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मौत की कबरगाह बनती जा रही है जर्जर विद्युत लाइनें

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नई टिहरी। टिहरी जिले में जर्जर विद्युत लाइनें जान पर भारी पड़ रही हैं। जिले में बीते साढ़े चार साल में बिजली का तार टूटने और झूलती लाइन की चपेट में आने से सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोग बुरी तरह झुलसे हैं। लगातार दुर्घटनाओं के बाद भी ऊर्जा निगम सुध लेने को तैयार नहीं है। सबसे खराब स्थिति जौनपुर, भिलंगना और प्रतापनगर ब्लॉक क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों की है, जहां झूलती विद्युत लाइनें मकानों और रास्तों में खतरा बनी हुई है।
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30 जून 2015 को भिलंगना ब्लॉक की हिंदाव पट्टी के ग्राम बडियार डडोली में खेतों में झूल रही विद्युत लाइन की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई थी और तीन लोग बुरी तरह झुलस गए थे। जौनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत टकराना के चडोगी में 23 अप्रैल 2015 को 11 केवी लाइन टूटने से ग्राम प्रधान सूरत घिमान की अपने ही घर में करंट लगने से मौत हो गई थी। 9 मई 2016 को भिलंगना के राजगांव में 11 केवी लाइन टूटने से एक बालिका और 12 जून 2019 को भिलंगना के देवठ गांव निवासी राम लाल के ऊपर 11 केवी लाइन टूटने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। 15 मार्च 2018 को लंबगांव बाजार में बस की छत से बिजली का तार टकराकर टूटकर गिर पड़ा था, तब तुरंत ही बिजली गुल होने से बस में सवार सभी 20 यात्री सशकुल बच गए थे।
जून 2014 में नरेंद्रनगर ब्लॉक के पयालगांव में हाईटेंशन लाइन के करंट से पांच लोग झुलस गए थे। कई घरों में कंरट दौड़ने से फ्रिज, वाशिंग मशीन और टीवी फुंक गए थे। तीन मई 2016 को ग्राम पडागली में करंट लगने से एक बालक बुरी तरह से झुलस गया था। बीते दो जून को कैंपटी में बस के इंतजार में खड़ी तीन युवतियां झूलते तारों का करंट लगने से झुलस गई थी। इन हादसों के बावजूद ऊर्जा निगम बिजली लाइन दुरुस्त करने को तैयार नहीं है। ढुंगमंदार पट्टी के मोल्ठा, गहड़, ढुंग, मंदार, सेमा, पिपोला, पौखार, कोठार और अखोड़ी गांव में विद्युत लाइनें झूल रही हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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प्रधान लिखित में करें शिकायत
झूलती विद्युत लाइन की लिखित शिकायत या बीडीसी बैठक में जहां भी जनप्रतिनिधि ऐसी शिकायतें उठाते है, उसके बाद लाइन मरम्मत का कार्य किया जाता है। यदि किसी गांव में समस्या है तो वहां के प्रधान को लिखित में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
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-राकेश कुमार, ईई ऊर्जा निगम टिहरी
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