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भगवान भरोसे चल रही है टाडा की व्यवस्थाएं

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नई टिहरी। टिहरी विशेष क्षेत्र प्राधिकरण (टाडा) की व्यवस्थाएं छह साल से भगवान भरोसे चल रही है। दो साल पहले प्रदेश सरकार ने टाडा के संचालन के लिए 24 पदों की मंजूरी दे दी है, लेकिन शासनादेश जारी नहीं हो पाया है। इससे झील क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। बोट लाइसेंस लेने के लिए लोगों को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
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42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी झील को पर्यटन गतिविधियों का केंद्र बनाने के लिए वर्ष 2014 में टिहरी विशेष क्षेत्र प्राधिकरण (टाडा) का गठन किया गया था। टाडा को झील क्षेत्र के आसपास बुनियादी सुविधा का विस्तार जैसे पानी, शौचालय, यात्री प्रतिक्षालय, रास्तों का निर्माण करना और बोट संचालन के लिए लाइसेंस जारी करना था, लेकिन शासनस्तर से पदों का सृजन न होने पर टाडा ने वैकल्पिक व्यवस्था पर 12 लोगों की तैनाती दी थी। 2017 अगस्त में प्रदेश सरकार ने टाडा के संचालन के लिए 24 पदों के सृजन की स्वीकृति दी थी, जिसके बाद टाडा ने वैकल्पिक व्यवस्था पर तैनात 12 लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। लेकिन दो साल बाद भी पदों के सृजन का शासनादेश जारी नहीं हो पाया है। पदों का सृजन न होने से कोटी कालोनी में 13 करोड़ की लागत से बनकर तैयार साहसिक खेल अकादमी भी बिरान पड़ी हुई है। वर्तमान समय में झील में 56 बोट, 8 जेटस्की, एक जेड अटैक और एक जेड बोट का संचालन हो रहा है, लेकिन कोटी कालोनी बोट प्वाइंट पर एक ही जेटी की व्यवस्था होने से नए बोटों के लाइसेंस जारी नहीं हो पा रहे हैं, जबकि टाडा के पास नए बोट लाइसेंस के लिए 45 लोगों के आवेदन जमा है।

चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद अब टाडा में पदों के सृजन का शासनादेश जारी होने की उम्मीद है। नए बोट लाइसेंस के लिए जो आवेदन जमा है, उनकी स्कूटनी होनी है। जल्द ही नए बोट लाइसेंस भी जारी किए जाएंगे।
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-अजयवीर सिंह, अपर मुख्य कार्याधिकारी टाडा
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