चंबा (टिहरी)। जड़धार गांव के ग्रामीणों ने सूझबूझ कर परिचय देते हुए चार दिन तक खतरों से खेलकर 80 हेक्टेयर में फैले बांज, बुरांस, काफल के जंगल को आग से बचाया है। पड़ोसी गांव बागी, पलास और मैठाणगांव से आए आग 40 साल से पनपाए गए जंगल के लिए खतरा बन गई थी, लेकिन ग्रामीणों की एकता से जंगल बच पाया है।
चंबा ब्लाक के सकलाना रेंज में जड़धार गांव का 120 हेक्टेयर बांज, बुरांस, काफल, भमोर, खागसी, दालचीनी आदि का घना जंगल है, लेकिन पड़ोसी गांव बागी, पलास और मैठाणगांव के जंगल में लगी आग 21 मई को जड़धार गांव के जंगल मेें पहुंच गई थी। आग से करीब 30 हेक्टेयर जंगल को भारी नुकसान पहुंचा है। बावजूद गांव के 40 से अधिक ग्रामीणों और वन विभाग की 10 सदस्यीय फायर टीम ने खतरों से खेला। टीम ने चार दिन के कड़ी संघर्ष के बाद 24 मई को देर सायं आग बुझाने में सफलता पाई, जिससे गांव का 80 हेक्टेयर जंगल और वन्य जीव आग से बच पाए हैं। वन पंचायत सरपंच राजेंद्र सिंह ने बताया कि पड़ोसी गांव में लगी आग से गांव के जंगल भी धधकने लगे थे, लेकिन ग्रामीणों की सूझबूझ से जंगल आग से बच पाए हैं। आग बुझाने वाले में सामाजिक कार्यकर्ता विजय जड़धारी, अजय सिंह, कुलदीप थापा, धीरेंद्र सिंह, ओंकार सिंह, जगवीर सिंह, तेजेंद्र सिंह, सुमन सिंह, बिरेंद्र सिंह, आशीष, साहब सिंह, हुकम सिंह, वन विभाग के रविंद्र सिंह, सुंदर लाल चमोली, कुंवर चंद्र रमोला ने आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।