नई टिहरी। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के कई स्कूल भवन पुनर्निर्माण और मरम्मत की बाट जोह रहे हैं। जिले में करीब 134 स्कूलों को नए भवन और 281 स्कूल भवनों को मरम्मत की जरूरत है, लेकिन जर्जर स्थिति में पहुंचे भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए सरकार बजट नहीं दे पा रही है। जिससे कई स्कूल खस्ताहाल भवन और पंचायत घरों में संचालित करने की मजबूरी बनी हुई है।
जिले में करीब 134 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं। उनमें से 30 भवन निष्प्रयोज्य घोषित किए गए हैं। जबकि 281 स्कूल भवनों को मरम्मत की जरूरत है, लेकिन सरकार स्कूल भवन बनाने के लिए बजट जारी नहीं कर पा रही है। जिससे कई स्कूल पंचायत घरों के एक कमरे में चलाए जा रहे हैं, जबकि सैकड़ों छात्र-छात्राओं को जोखिम उठाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। सरकार ने 30 भवन निर्माण 13 की मरम्मत कराने की स्वीकृति तो दी है, लेकिन अभी तक बजट नहीं दिया है। स्थिति यह है कि स्वच्छ भारत अभियान चलाए जाने के बावजूद शौचालय बनाने के लिए भी बजट नहीं मिल पा रहा है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूल भवनों के साथ ही 182 पुरुष और 50 महिला शौचालय बनाने के प्रस्ताव भेजे गए थे, जिसमें से छह बालिका शौचालयों की स्वीकृति मिली, लेकिन बजट नहीं मिला।
एसएसए के माध्यम से स्कूल भवन बनाने के लिए 2665.8 लाख, मरम्मत के लिए 432.49 लाख और शौचालय बनाने के लिए 315.52 लाख के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। कुछ की सैद्धांतिक स्वीकृति मिली गई है। बजट मिलने पर कार्य शुरू कराया जाएगा।
-सुदर्शन सिंह बिष्ट, डीईओ बेसिक नई टिहरी।