नई टिहरी। कद्दूखाल से सिद्धपीठ सुरकंडा तक रोपवे में यात्रा करने के लिए श्रद्धालुओं को अब दिसंबर तक इंतजार करना होगा। तब तक सुरकंडा देवी के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को पैदल दूरी ही तय करनी होगी। रोपवे निर्माण की कछुआ गति से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। रोपवे निर्माण की सुस्त रफ्तार वृद्ध और दिव्यांग भक्तों की राह में बाधा बनी हुई है। मंदिर तक दर्शनों के लिए उन्हें घोड़े और खच्चरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सिद्धपीठ सुरकंडा देवी मंदिर में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कद्दूखाल से मंदिर तक डेढ़ किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है, जिससे वृद्ध और दिव्यांग लोग आसानी से मंदिर तक नहीं पहुंच पाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2014-15 में कद्दूखाल से सुरकंडा तक रोपवे निर्माण के लिए 13 करोड़ की धनराशि जारी की थी। पीपीपी मोड में बनने वाले कद्दूखाल-सुरकंडा रोपवे निर्माण का कार्य कार्यदायी संस्था सुरकंडा देवी रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी लि. दिल्ली ने 19 जून 2017 को शुरू किया था। कार्यदायी संस्था ने एक जनवरी 2019 से रोपवे का संचालन शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन समय सीमा के अंतर्गत कार्य पूरा न होने पर डेट बढ़ाकर मई 2019 से रोपवे का संचालन शुरू किया गया।
रोपवे होने पर चार से पांच मिनट में कद्दूखाल से सुरकंडा मंदिर परिसर में पहुंच सकेंगे। 10 ट्राली कद्दूखाल से श्रद्धालुओं को लेकर मंदिर तक जाएगी। 10 ट्राली मंदिर से श्रद्धालुओं को कद्दूखाल वापस पहुंचाने का काम करेगी। एक ट्राली में छह लोग एक साथ बैठकर मंदिर तक पहुुंच सकते हैं।
कद्दूखाल-सुरकंडा देवी रोपवे पर निरंतर काम चल रहा है। इस साल जनवरी से मार्च माह तक सुरकंडा और आसपास अधिक बर्फ गिरने के कारण बार-बार कार्य बाधित हुआ है। तीन अलग-अलग स्थानों पर रैप का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। दिसंबर तक अब रोपवे का संचालन हर हाल में शुरू कर दिया जाएगा।
-अनिल शर्मा, निरीक्षक सुरकंडा देवी रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी