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चार साल बाद भी नहीं चली बार्ज बोट

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नई टिहरी। प्रतापनगर के बांध प्रभावित क्षेत्र के लोगों के कष्ट दूर होने के नाम नहीं ले रहा हैं। सितंबर 2015 में जब बार्ज बोट ट्रायल के लिए टिहरी झील में उतरी तो प्रभावितों को बड़ी उम्मीद जगी कि जल्द ही उन्हें झील से आरपार होने में सुविधा मिलेगी, लेकिन चार साल बाद भी बार्ज बोट का संचालन शुरू नहीं हो पाया।
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टिहरी बांध की झील के कारण आवाजाही में परेशानियां झेल रहे प्रतापनगर के लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए सरकार ने 2013 में सौ लोगों और आधा दर्जन वाहनों को आरपार के लिए करीब तीन करोड़ की लागत से बार्ज बोट उतारने का निर्णय लिया था। बमुश्किल 2015 अप्रैल में मुंबई की एक कंपनी ने कोटीकालोनी झील किनारे बार्ज बोट का निर्माण शुरू कर सितंबर में ट्रायल किया था। सरकार ने बार्ज को चलाने के लिए पीपीपी मोड देने का निर्णय लिया था, लेकिन सरकार को कोई पार्टनर नहीं मिल पाया। वर्ष 2018 में बार्ज बोट टाडा (टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण) को हस्तांतरित किया गया। टाडा के पास नियमित रूप से बार्ज को चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। वर्तमान में टाडा केवल सरकारी कार्यक्रमों में ही बोट का संचालन करता है। टाडा के अपर मुख्य कार्याधिकारी अजयवीर सिंह का कहना है कि वर्तमान में बार्ज बोट टाडा के पास है, जो व्यक्ति बार्ज का प्रयोग करना चाहते हैं। वह टाडा में न्यूनतम चार्ज जमा करवाकर बार्ज की सुविधा ले सकते हैं। नियमित चलाने पर विचार चल रहा है।
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