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पानी और सीवर शुल्क माफ होने पर तेज हुई सियासत

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नई टिहरी। प्रदेश सरकार की ओर से कैबिनेट बैठक में टिहरी बांध विस्थापितों के सीवर और पानी का बिल माफ करने के निर्णय पर सियासत तेज हो गई है। इस मामले का श्रेय लेने के लिए भाजपा, कांग्रेस, नागरिक मंच, एकता मंच और सहित अन्य दलों में होड़ मच गई है। जहां कांग्रेस ने इसे लोकसभा चुनाव के लिए लोक लुभावनी घोषणा बताया वहीं भाजपा ने सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया। अन्य दलों के लोगों ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने बिल जमा कर दिए है उनकी धनराशि सरकार को ब्याज सहित वापस लौटानी चाहिए।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शांति प्रसाद ने कहा कि टिहरी बांध प्रभावितों से कांग्रेस सरकार ने हनुमंत राव कमेटी की सिफारिशों के तहत पानी और सीवर शुल्क नहीं लिया था, लेकिन भाजपा के सत्ता में आते ही उपभोक्ताओं को नोटिस जारी कर जबरन सीवर और पानी का बिल वसूल किया गया है। सरकार बताए कि क्या नई टिहरीवासियों के पेयजल और सीवर के बिल पूर्ण रूप से माफ कर दिए है। बिजली के बिलों में उपभोक्ताओं को कब रियायत दी जाएगी। बांध प्रभावित 17 गांवों के 415 परिवारों का कब पुनर्वास किया जाएगा।
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एकता मंच के संयोजक आकाशा कृषाली ने कहा कि लंबे जन आंदोलन के बाद सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। वित्त मंत्री प्रकाश पंत को एकता मंच ने नई टिहरी कलक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा था। पूर्व पालिकाध्यक्ष उमेश चरण गुसाईं ने कहा जिन विस्थापितों ने ईमानदारी के साथ बिल जमा किए उन्हें जमा की गई धनराशि ब्याज सहित वापस दी जानी चाहिए। नागरिक मंच ने बैठक कर सरकार के फैसले को स्वागतयोग्य बताया है। बैठक में मंच के अध्यक्ष सुंदर लाल उनियाल, महिपाल सिंह नेगी, जगदंबा प्रसाद डबराल, गंगाधर चमोली, बचन सिंह तोपवाल, हिम्मत सिंह तोपवाल, गोपाल सिंह, विजेंद्र सिंह, सूर्यमणि भट्ट आदि उपस्थित रहे।
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