चंबा (टिहरी)। बमण गांव में उत्तराखंड का पौराणिक पांडव नृत्य और मंडाण पांडवों के अस्त्र-शस्त्रों और देवी-देवताओं के नेजा-निशानों की शुद्धि के साथ शुरू हो गया है। गांव में नौ दिन तक पांडव पूजन और रात को मंडाण में जागर गाकर पांडवों की गाथाएं गायी जाएगी। इसमें शिरकत करने के लिए दूर-दूर से ध्याणियां (विवाहित बेटियां) भी पांडव नृत्य में शिरकत कर आशीष लेने पहुंच रही हैं।
क्वीली पट्टी के बमण गांव में सोमवार को नौ दिन तक चलने वाले पांडव नृत्य का शुभारंभ हो गया। रविवार देर रात को गांव के लोग मंडाण स्थल पहुंचे। इसके बाद मंडाण स्थल पर अखंड दीपक जलाने के बाद पांडवों की स्तुति वंदना की गई। सोमवार सुबह पांडवों के नेजा-निशाणों की शुद्धि कर ढोल-नगाड़े, शंख, घड़ियाल आदि की ध्वनि से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। इसके बाद एक पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया गया। गांव के लोकेंद्र प्रसाद बिजल्वाण ने बताया कि बमण गांव के निकट पांडवों ने कुछ समय तक निवास किया था। वहां पांडव कालीन कई अवशेष आज भी मौजूद हैं। पांडव नृत्य मंडाण समिति के अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद बिजल्वाण, प्रधान हर्षिका देवी ने बताया कि गांव में यह परंपरा ग्रामीणों के प्रयास से बची हुई है। इस मौके पर अशोक बिजल्वाण, राकेश चौहान, धूम सिंह चौहान, नरेंद्र बिजल्वाण, प्रमोद, मंगलानंद नौटियाल, गणेश प्रसाद, किशोरी लाल और मुरारी आदि मौजूद थे।