नई टिहरी। लोकतंत्र के महापर्व पर मतदान करने के लिए दिव्यांगजनों और बुजुर्ग मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। एनएसएस, एनसीसी के स्वयं सेवी दिव्यांग को मतदान केंद्र तक पहुंचाने में सारथी बने।
प्रतापनगर के नौघर में दिव्यांग सोना देवी, भगवान सिंह, पनियाला के बालक राम पैन्यूली, पुजारगांव के बलवीर दास, गलियाखेत के मुकेश, बबीता, केमवाल गांव के धूम सिंह, सुमेर सिंह ने भी वोट किया। नरेंद्रनगर सखी बूथ पर बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को गुलदस्ता देकर सम्मानित किया गया। समाज कल्याण विभाग ने एनसीसी, एनएसएस और नेहरू युवा केंद्र के स्वयं सेवियों के सहयोग से दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने में मदद की। जिले में 638 बूथों पर 3379 दिव्यांग मतदाता चिह्नित किए गए थे। शाम पांच बजे तक 2257 दिव्यांगों ने मताधिकार का प्रयोग किया।
गोपेश्वर/कर्णप्रयाग/पौड़ी। दशोली ब्लॉक के ठेली गांव का 32 वर्षीय मनवर सिंह जन्मांध है, लेकिन उन्होंने बूथ पहुंचकर मताधिकार का प्रयोग किया। मेड़ गांव की दिव्यांग संतोषी नेगी भी वोट डाला। उधर, ऐरवाड़ी बूथ पर दिव्यांग धनंजय सिंह लिंगवाल को डोली में लेकर मतदान कराया गया। वहीं पौड़ी के ग्राम केवर्स के दिव्यांग मतदाता दीवान सिंह ने कहा कि वह मतदान के प्रति हमेशा जागरूक रहे हैं।
रुद्रप्रयाग। किमाणा पोलिंग बूथ में दिव्यांग वृद्ध सुमति देवी को मतदान के उपरांत पुष्प गुच्छ भेंट किया गया। इधर, जीआईसी व जीजीआईसी में भी कई दिव्यांग मतदाताओं ने वोट दिया। उधर, मदोला पोलिंग बूथ में दिव्यांग का मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
बड़कोट/चिन्यालीसौड़। चिन्यालीसौड़ ब्लॉक में निर्वाचन की टीम ने जयवीर पंवार को वाहन की मदद से सुलीठांग से 12 किमी दूर स्थित कोट गांव पोलिंग बूथ पहुंचाया। वहीं नौगांव ब्लॉक में दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के सदस्य सुरेंद्र रावत ने गैर बनाल गांव निवासी दिव्यांग भवानी प्रसाद को अपनी पीठ में लादकर करीब डेढ़ किमी दूर स्थित पोलिंग बूथ तक पहुंचाया। उधर बड़कोट महाविद्यालय के 40 एनएसएस स्वयंसेवियों ने करीब दो दर्जन दिव्यांग व वृद्ध मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाया। राइंका श्रीकालखाल के एनएसएस स्वयंसेवियों ने भी विभिन्न गांवों के अशक्त वोटरों को पोलिंग बूथ तक पहुंचने में मदद की। यहां कार्यक्रम अधिकारी सुरक्षा रावत के नेतृत्व में मोनिका, मीनाक्षी, उपासना, साक्षी, मोहित, जयवीर, रामदेव, सुमन सिंह आदि स्वयंसेवी छात्र-छात्राओं ने अशक्त मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने और घर लौटने में सहायता की। पौंटी गांव में दिव्यांग भूपेंद्र भंडारी अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाया।