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टीएचडीसी आरएल -compat

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नई टिहरी। प्रदेश सरकार ने टिहरी बांध का जलस्तर आरएल (रिजर्व वाटर लेबल) 830 मीटर तक भरने की अनुमति दे दी है। अब टीएचडीसी आरएल 827 मीटर तक सीधे तौर पर जलाशय को भर सकती है, लेकिन आरएल 827 से ऊपर भरने के लिए पुनर्वास निदेशक/डीएम से अनुमति लेनी जरूरी होगी। बृहस्पतिवार को टिहरी झील का जलस्तर आरएल 824.85 मीटर रहा है। जलस्तर अधिक भरने की अनुमति मिलने से बांध से विद्युत उत्पादन में वृद्धि होगी और बारिश कम होने से भी उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा।
टीएचडीसी लंबे समय से झील के जलस्तर को आरएल 830 मीटर तक भरने की मांग कर रही थी। वर्ष 2005 में बनी टिहरी बांध झील को अभी तक केवल आरएल 825 मीटर तक ही भरने की अनुमति थी, जबकि झील को अधिकतम 835 मीटर तक भरा जा सकता है। गौरतलब तथ्य यह है कि जब से झील बनी है, तब से झील के आसपास के क्षेत्रों में लगातार भूस्खलन हो रहा है। बांध प्रभावित गांवों के लोग भी जलस्तर बढ़ाने का विरोध कर रहे थे। बांध प्रभावितों के विरोध को देखते हुए प्रदेश सरकार जलस्तर 830 तक भरने की अनुमति देने से बच रही थी, लेकिन अब आखिरकार सरकार ने टीएचडीसी को जल स्तर बढ़ाने की अनुमति दे दी है। 19 सितंबर को सिंचाई सचिव की ओर से जारी आदेश में टीएचडीसी को जलस्तर आरएल 827 मीटर सीधे तौर पर भरने की अनुमति दी गई है, 827 मीटर के बाद जल स्तर बढ़ाने से पहले टीएचडीसी को पुनर्वास निदेशक से अनुमति लेनी होगी। निदेशक की अनुमति के बाद ही टीएचडीसी जलस्तर 830 मीटर तक भर सकती है।
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जलस्तर बढ़ाने की अनुमति मिलने से टीएचडीसी की वर्षों पुरानी मुराद पूरी हो गई है। अभी तक केवल आरएल 825 मीटर तक जलस्तर भरने की अनुमति होने से टीएचडीसी को शीतकाल में मांग के अनुरूप विद्युत उत्पादन न होने से नुकसान उठाना पड़ रहा था। शीतकाल में जहां जलस्तर कम होता है, वहीं पावर ग्रिड से बिजली की ज्यादा डिमांड आती है, ऐसे में जलस्तर कम रहने से पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पा रहा था।

कोट
प्रदेश सरकार ने टिहरी झील का जलस्तर पांच मीटर और बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अब तक टीएचडीसी को आरएल 825 मीटर तक ही पानी भरने की अनुमति थी। टीएचडीसी आरएल 827 मीटर तक सीधे तौर पर झील भर सकती है। इसके बाद आरएल 830 तक भरने के लिए पुनर्वास निदेशक से अनुमति लेगी होगी। - सोनिका, पुनर्वास निदेशक/ डीएम टिहरी।
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पहले होना चाहिए था प्रभावितों का पुनर्वास : नेगी
प्रतापनगर के पूर्व विधायक विक्रम नेगी ने झील का जल स्तर बढ़ाने की अनुमति दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वर्षों से पुनर्वास के लिए चिह्नित 415 परिवारों के पुनर्वास सहित बांध प्रभावितों की अन्य समस्याओं के निराकरण के बाद ही जल स्तर बढ़ाने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।
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