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गुरू शिष्या पंरपरा से युवाओं को मिलेगा आगे बढने का अवसर-compat

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लंबगांव (टिहरी)। उत्तराखंड की परंपरागत संस्कृति को जीवित रखने के लिए संस्कृति विभाग की पहल पर शुरू की गई गुरू शिष्य परंपरा कार्यक्रम का मुखमालगांव में शुभारंभ किया गया। बाजगी समुदाय के लोगों को गुरू शिष्य परंपरा की जानकारी दी गई। बाजगियों ने ढोल और दमाऊ वाद्य यंत्रों की शानदार प्रस्तुतियां दी।
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बृहस्पतिवार को मुखमालगांव में आयोजित गुरू शिष्य परंपरा का शुभारंभ प्रधान प्रताप सिंह राणा ने किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी अब ढोल-दमाऊं बजाने के लिए आगे नहीं आ रही है, जिससे हमारी परंपरागत संस्कृति विलुप्त होने के कगार पर है। सरकार की नई पहल से युवाओं को ढोल-दमाऊं प्रशिक्षण के लिए आगे आने का मौका मिलेगा। गांवों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। परंपरा गुरू अनिल कुमार ने गुरू शिष्य परंपरा योजना की जानकारी देते हुए ढोल-दमाऊं के सुरतालों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर हेमराज सिंह राणा, गोविंद सिंह, राम प्रकाश, रोशन लाल, जसपाल आर्य, बनवारी लाल, देवेंद्र लाल आदि उपस्थित थे। ब्यूरो
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