नई टिहरी। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने ‘धीरे-धीरे कालाधन होता है सफेद, नजर जो मिलती तो जान लेते’, ‘तुम्हारे दिल में हुजूर क्या है, यदि कभी साथ सत्यता का दे सको न आप’ समेत कई कविताओं की प्रस्तुति से भ्रष्टाचार, कालेधन और बुराइयों पर की चोट।
भागीरथपुरम में आयोजित कवि सम्मेलन का टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक एसआर मिश्रा ने शुभारंभ किया। कवि डा. अनिल चौबे ने कहा कि ‘धीरे धीरे कालाधन होता है सफेद...’, की प्रस्तुति दी। श्रृंगार रस की कवियत्री पूनम वर्मा ने ‘नजर जो मिलती तो जान लेते, तुम्हारे दिल में हुजुर क्या है...’, राधाकांत पांडे ने ‘यदि कभी साथ सत्यता का दे सको न आप, शुद्ध भावना रखो अशुद्ध मत बोलना...’, गजेंद्र सोलंकी ने ‘युगों-युगों से कलकल कर बहता गंगा का पानी है...’, गौरव शर्मा ने ‘आजादी के बाद क्या खोया क्या पाया...’, वीर रस के कवि मनवीर मधुर ने भी कई कविताएं प्रस्तुत की। इस मौके पर महाप्रबंधक (कोटेश्वर परियोजना) पीके अग्रवाल, महाप्रबंधक (पीएसपी) केपी सिंह, महाप्रबंधक (ओएंडएम) सजीव आर, महाप्रबंधक (पीएसपी विद्युत) एसएस पंवार, अपर महाप्रबंधक आरआर सेमवाल, वरिष्ठ प्रबंधक नेलसन लकडा, एसवी प्रसाद, डीपी भट्ट, प्रबंधक मोहन सिंह, उप प्रबंधक इंद्रराम नेगी, मनोज राय, मनवीर नेगी, दीपक उनियाल, नीरज सिंह, चंद्रवीर नेगी, रणजीत सिंह आदि मौजूद थे।