नई टिहरी। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने टिहरी बांध से हुई समस्याओं का तीन माह के अंदर निराकरण करने के निर्देश दिए। एनजीटी ने प्रभावितों की समस्याओं का निराकरण नहीं करने पर राज्य सरकार को फटकार भी लगाई।
चांठी-डोबरा पुल बनाओ संघर्ष समिति के संयोजक राजेश्वर प्रसाद पैन्यूली और जय प्रकाश डबराल ने 2017 में टिहरी झील से हुई समस्याओं को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने टिहरी बांध के आसपास हो रहे भूस्खलन से प्रभावित गांवों का पुनर्वास, झील में डूबे पैतृक घाटों के स्थान पर नए घाटों का निर्माण, विस्थापन करने, डोबरा-चांठी पुल का निर्माण, स्वास्थ्य की समस्याओं को दूर करने और सिरांई दिव्यांग बांध प्रभावित प्रमोद कुमार रतूड़ी को भूखंड आवंटन करने की मांग की थी। इस संबंध में एनजीटी ने सरकार और टीएचडीसी को नोटिस भेजे थे, लेकिन उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। 25 जुलाई को एनजीटी के चेयर पर्सन आदर्श कुमार गोयल, जूडीशियल मेंबर एसपी वांगदी और एक्सपर्ट मेंबर नगिन नंदा ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को समस्याओं का निराकरण न करने पर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने तीन माह के अंदर निराकरण करने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता पैन्यूली ने बताया कि तीन माह के अंदर प्राधिकरण के आदेश पर कार्रवाई न होने पर रिव्यू याचिका और उच्चतम न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।