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शादी की रस्म निभाते ही विवाह पंजीकरण कराने पहुंचे नवदंपति

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नई टिहरी। शादी की रस्म पूरी करने के बाद विवाह पंजीकरण कराने पहुंचे एक नव विवाहित जोड़े ने नव दंपतियों को अनिवार्य विवाह पंजीकरण कराने का संदेश दिया है। उप निबंधक ने पति-पत्नी को विवाह पंजीकरण का प्रमाणपत्र देते हुए कहा कि सभी धर्मों के लोगों को अनिवार्य विवाह पंजीकरण का पालन करना चाहिए, जिससे भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
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वर्ष 2010 में बनाया गया अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम 2012 में लागू किया गया। बावजूद जागरूकता के अभाव में अभी कई नव दंपति पंजीकरण कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उप निबंधक कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2012 से अभी तक टिहरी, प्रतापनगर, धनोल्टी, नैनबाग, कंडीसौड़, गजा और जाखणीधार तहसील क्षेत्र से मात्र 2872 दंपतियों ने ही विवाह पंजीकरण कराया है, जबकि विभाग की ओर से दिसंबर 2015 से ऑन लाइन पंजीकरण की सुविधा भी शुरू की गई है। हालांकि अनिवार्य पंजीकरण के बाद हर साल पंजीकरण कराने वालों की संख्या बढ़ रही है। वर्ष 2012 में जहां 230 लोगों ने पंजीकरण कराया है, वहीं वर्ष 2017 में यह संख्या 561 पहुंच गई और इस साल अभी तक 355 लोगों ने पंजीकरण कराया है। दिल्ली से बारात लेकर बौराड़ी पहुंचे दूल्हे विजय सिंह राणा और दुल्हन रेखा रावत ने कहा कि शादी के पल को यादगार बनाने के लिए शनिवार को विवाह के दिन ही पंजीकरण कराने का निर्णय लिया है। अधिवक्ता जयवीर सिंह रावत ने कहा कि राजकीय कार्यों में अब पंजीकरण जरूरी है।

विवाह पंजीकरण के यह भी हैं फायदे-
शादी के एक माह के भीतर विवाह पंजीकरण कराने पर किसी भी विधवा की पुत्री और एससी-एसटी की पुत्रियों को समाज कल्याण विभाग की ओर से 50 हजार रुपये की मदद दी जाती है। यही नहीं श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक भी कुछ शर्तों पर श्रम विभाग से पुत्री की शादी पर 51 हजार की मदद ले सकते हैं।
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विवाह पंजीकरण कराना सभी धर्मों के लिए अनिवार्य किया गया है। जहां शादी हुई या जहां रहते हैं, वहां पंजीकरण करा सकते हैं। इस साल अभी तक 355 दंपतियों ने पंजीकरण कराया है।
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- मोहित शर्मा, प्रभारी उप निबंधक नई टिहरी।
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