नई टिहरी। पुनर्वास की मांग को लेकर टिहरी बांध प्रभावित नंदगांव, भटकंडा, पिपोला खास, रौलाकोट, गढोली रैका और चोपड़ा गांव के लोगों ने टिहरी झील महोत्सव में जमकर हंगामा काटा। कोटी कालोनी पंडाल के अंदर घुसकर बांध प्रभावितों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। महोत्सव आयोजन के नाम पर सरकार पर प्रभावितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का आरोप लगाया। इस दौरान एसडीएम और पुलिस कर्मियों की आंदोलनकारियों से तीखी झड़पें हुईं। आंदोलनकारियों ने प्रशासन के अधिकारियों को जमकर खरी खोटी भी सुनाई।
आंशिक डूब क्षेत्र संघर्ष समिति के बैनर तले बांध प्रभावित उक्त गांवों के लोग पुनर्वास करने की मांग को लेकर 23 मई से पुनर्वास निदेशालय में धरने पर बैठे हुए हैं। शुक्रवार को आंदोलनकारी समिति के अध्यक्ष सोहन सिंह राणा के नेतृत्व में कोटी कालोनी स्थित टिहरी झील महोत्सव के पंडाल में जा घुसे। कुछ देर तक वे पंडाल के अंदर मुख्यमंत्री के इंतजार में शांत होकर बैठे रहे। जब मुख्यमंत्री नहीं पहुंचे तो अपराह्न 2.30 बजे बांध प्रभावितों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। एसडीएम ने समिति के अध्यक्ष का हाथ पकड़ा तो महिलाओं ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच जमकर झड़पें हुईं। बाद में पुलिस की मदद से प्रशासन ने सभी आंदोलनकारियों को पंडाल से बहार कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि टिहरी झील महोत्सव के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर ही है, लेकिन झील से प्रभावित 17 ग्राम पंचायतों में निवासरत 415 परिवारों का पुनर्वास करने के लिए सरकार के पास बजट का अभाव बना हुआ है। कहा कि पुनर्वास न होने तक आंदोलन चलता रहेगा। प्रदर्शन करने वालों में ग्राम प्रधान प्रदीप भट्ट, दलवी देवी, धनपाल बिष्ट, जगदंबा सेमवाल, नीलम रावत, रेखा देवी, रुकमणि देवी, लक्ष्मी देवी, सुनीता, बसंता देवी, कांता देवी, उम्मेद सिंह, राम सिंह व विजयराम भट्ट आदि शामिल रहे।