चंबा (टिहरी)। छात्र-छात्राओं को प्रत्येक कार्य में दक्षता हासिल करने के लिए मंगलवार को सरस्वती शिशु मंदिर में हनुमान मैनेजमेंट कार्यालय आयोजित की गई।
प्रधानाचार्य मोहन सिंह कुमाईं ने कहा कि संघर्ष, क्षमता, साहस, चतुराई की कला हनुमान से सीखने को मिलती है। कहा कि हनुमान समय, वाणी, ज्ञान और संसाधनों का सटीक प्रयोग करना जानते हैं, इसीलिए संसार के सबसे बड़े मैनेजमेंट गुरु कहे जाते हैं। बजरंगबली ने लंका में जाकर सबसे पहले लंका की संरचना को समझा। असुरों की सभा में विभीषण जैसे सज्जन को ढूंढा। विभीषण से मित्रता की और सीता का पता लगाया। मोहन लाल सेमवाल ने कहा कि हनुमान का चरित्र सेवा और आत्म समर्पण का प्रत्यक्ष रूप है। इस मौके पर कमला देवी, ओमप्रकाश कोठारी, मनोहर लाल रतूड़ी आदि मौजूद थे। ब्यूरो