चंबा (टिहरी)। बनाली गांव हेंवल नदी और मरोड़ गाड़ के बीच बसा है, लेकिन गांव के लोग आज भी पीने के पानी को तरस रहे हैं। दशकों बाद भी गांव में पेयजल योजना स्वीकृत नहीं होने के कारण ग्रामीण दो से चार किमी दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। अब गर्मियां शुरू होते ही कुएं का पानी कम होने से उनके सामने जल संकट मंडराने लगा है।
बनाली गांव के एक ओर दर्जनों गांव की प्यास बुझाने वाली हेंवल नदी और दूसरी ओर सौंग नदी बहती है। मगर गांव तक पेयजल लाइन नहीं होने के कारण ग्रामीण दो-तीन किमी दूर कुएं और प्राकृतिक स्रोतों से प्यास बुझाने को मजबूर हैं। अब गर्मियां बढ़ते ही पानी कम होने से ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ने लगी है। ग्रामीण लंबे समय से गांव तक पेयजल योजना की मांग कर हैं, लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। गर्मियों में कुएं का पानी पीने से जल जनित रोगों का खतरा भी बना रहता है। प्रधान कुंवर सिंह मनवाल, बिजेंद्र सिंह ने कहा कि पेयजल समस्या ग्रामीणों के सामाजिक जीवन पर विपरीत असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक गांव की पेयजल योजना को स्वीकृति नहीं मिल जाती है, जब तक सुरकंडा पंपिंग पेयजल योजना का काम नहीं करने दिया जाएगा। इस बाबत जल निगम के ईई आलोक कुमार ने कहा कि बनाली के लिए पंपिंग योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।