घनसाली (टिहरी)। आपदा से प्रभावित कोठियाड़ा गांव के लोगों ने सरकार और समाज को आइना दिखाने का काम किया है। एक वर्ष पहले आपदा से उजड़े गांव को बसाने के लिए पर्याप्त मदद नहीं मिलने पर पुनर्वास के लिए सरकार का मुंह ताकने के बजाए ग्रामीणों ने गंवाणा नामे तोक में मकान बनाकर पूरा गांव बसा दिया।
भिलंगना ब्लॉक में केमर पट्टी का कोठियाड़ा गांव 28 मई 2016 को बादल फटने से तबाह हो गया था। खेती-बाड़ी और पशुपालन से अपनी आजीविका चलाकर गुजर-बसर कर रहे 72 परिवारों का पिंक नाम से प्रसिद्ध गांव मलबे में तब्दील हो गया था। आपदा के कहर से बेघर हुए परिवारों को प्रशासन ने दो-दो लाख रुपये दिए थे।
ग्रामीणों ने विस्थापन के लिए सरकार का मुंह ताकने के बजाए स्वयं गंवाणा नामे तोक में मकान बनाकर नया कोठियाडा बसाकर विस्थापन की मांग कर रहे आपदा प्रभावित गांव के लोगों के सामने एक नजीर पेश की है। प्रधान बुद्धा देवी, आनंद व्यास और देवेंद्र जोशी ने बताया कि आपदा का जख्म खाए ग्रामीणों ने सरकार का मुंह ताकने के बजाए खुद ही मेहनत से गांव बसाने का फैसला लिया, लेकिन अब प्रभावितों के सामने घर बसाने को लिए गए कर्ज को चुकाने की चुनौती भी बनी हुई है। तहसीलदार एमएल आर्य का कहना है कि आपदा के मानकों के अनुरूप प्रभावित परिवारों को राहत राशि दी गई थी। आपदा के मलबे में दबे पशुओं का भी मुआवजा दिया गया था। ग्रामीणों ने स्वयं की मेहनत से गांव बसाकर बेहतर काम किया है।