नई टिहरी। अदरक का स्वाद अब लोग चटपटी कैंडी के रूप में भी ले सकेंगे। साथ ही अदरक का पाउडर भी खाने का जायका और बढ़ाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी के वैज्ञानिक अदरक की कैंडी और पाउडर बनाने में सफल रहे हैं। केवीके की तैयार की गई स्वादिष्ट कैंडी को करीब तीन सौ रुपये किलो और पाउडर को दो सौ रुपये किलो बिक रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी की खाद्य प्रसंस्करण वैज्ञानिक कीर्ति कुमारी ने अदरक का नए तौर पर प्रयोग कर मीठी कैंडी और सूखा पाउडर बनाने भी शुरू कर दिया है। कई माह के परीक्षण के बाद स्वादिष्ट कैंडी बनानी शुरू हो गई है। जिसमें अदरक जैसा तीखा पन नहीं है, वह चपपटी स्वादिष्ट एवं खाने में मीठी हो रही है। देवकांश आर्गोनाइजेशन, हिमालय नेचुरल फुड प्रोडेक्टस (हिल्स), देवभूमि वेंचरस, गैरसरकारी संस्थानों से लेकर आसपास के किसानों को भी अदरक से कैंडी एवं पाउडर बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यदि अदरक बनाने की विधि का किसानों ने उपयोग किया, तो स्वरोजगार के दिशा में बढ़ा कदम हो सकता है। केवीके के वैज्ञानिक खाद्य प्रसंस्करण कीर्ति कुमारी का कहना है कि गढ़वाल में अदरक की कैंडी एवं पाउडर बनाने का काम पहली बार शुरू हुआ है। तैयार की जा रही कैंडी चटपटी एवं स्वादिष्ट है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद की अच्छी है।
कैंडी बनाने की विधि-
अदरक की सफाई, छिलना उतार देना चाहिए। साफ सूखे कांच के बर्तन में अदरक को भरना पड़ता है। इसके बाद 70 ब्रिक्स तक की बढ़ती हुई सांद्रता के चीनी सिरप में तर किया जाता है। इसके बाद पानी निकाल कर, चीनी के साथ मिलाकर छह-सात घंटे सूखाकर कैंडी तैयार हो जाती है।