नई टिहरी। फ्रांस में खुदाई के दौरान गढ़वाल राइफल्स के जवानों के अवशेष मिलने की सूचना पर प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुए टिहरी जिले के कुठ्ठा गांव निवासी प्रताप सिंह पुत्र भागदेऊ के परिजनों ने भी डीएनए टेस्ट कराने की इच्छा जताई है।
इतिहासकारों के मुताबिक 1887 में अल्मोड़ा में गठित गढ़वाल राइफल की दो बटालियन जिसमें दो सौ से अधिक सैनिक शामिल थे। युद्ध में शामिल होने के लिए 14 अक्तूबर 1914 को फ्रांस के बंदरगाह पर पहुंची थी। 23 नवंबर 1914 में फ्रांस और जर्मनी के बीच युद्ध का आगाज हुआ था। बटालियन में शामिल वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, दरमान सिंह नेगी और वहां युद्ध में शहीद हुए वीसी गबर सिंह भी शामिल थे। फ्रांस में मिले अवशेष शीर्षक से प्रकाशित खबर पढ़ने के बाद प्रथम विश्व युद्ध में शामिल रहे टिहरी जिले में सारज्यूला पट्टी के ग्राम कुठ्ठा निवासी अविवाहित शहीद प्रताप सिंह के परिजनों ने डीएनए टेस्ट कराने की इच्छा जाहिर की है। शहीद के पोते उत्तम सिंह रावत ने फ्रांस सरकार की ओर से दिए गए ताम्र पत्र को दिखाते हुए बताया कि तत्कालीन टिहरी राजा ने शहीद की मां को ताम्र पत्र भेंट कर उन्हें एक हजार रुपये का पुरस्कार और तीन सौ रुपये मासिक पेंशन भी लगाई थी। पोते को उम्मीद है कि फ्रांस में गढ़वाल राइफल्स के जवानों के जो अवशेष मिले हैं, उनमें प्रताप सिंह भी शामिल हो सकते हैं। गढ़वाल राइफल्स परिजनों का डीएनए टेस्ट लेती है, तो पहचान स्पष्ट हो सकती है।