नई टिहरी। टिहरी बांध की झील के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से बांध प्रभावित 415 परिवारों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई है। टीएचडीसी इस बार जलस्तर अधिकतम आरएल 825 मीटर भरने की तैयारी में हैं। वर्तमान में जलस्तर आरएल 822 मीटर पहुंच गया है। ऐसे में जलस्तर बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में भूस्खलन की समस्या बढ़ सकती है।
भागीरथी और भिलंगना घाटी के झील के आसपास निवासरत 45 गांव के 190 परिवारों का पुनर्वास नीति, 104 का सांपाश्विक क्षति नीति और 120 परिवारों का देखरेख के तहत पुनर्वास होना था। पुनर्वास निदेशालय ने वर्ष 2010 में प्रभावित परिवारों का भू-गर्भीय सर्वे समेत संपूर्ण औपचारिकताएं पूरी कर पात्रता का निर्धारण किया है। निदेशालय अधिकांश परिवारों को नकद प्रतिकर भुगतान भी कर चुका है। लेकिन पुनर्वासित करने को मिलने वाले आवासीय एवं कृषि भूखंड आवंटन को भूमि उपलब्ध न होने से भूखंड आवंटित नहीं कर पा रहा है। पुनर्वास को राज्य सरकार ने सितंबर 2016 में पशुलोक, आईडीपीएल और दूधू पानी में 406 हेक्टेयर भूमि का चयन कर केंद्र सरकार को स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजा था। केंद्र सरकार ने भूमि के प्रस्ताव पर कुछ आपत्तियां लगाकर वापस भेजा था। टीएचडीसी को सरकार ने कई वर्ष पहले जलस्तर आरएल 825 तक भरने की अनुमति दी है। टीएचडीसी इस बार तीन-चार साल बाद जलस्तर 825 तक भरने की तैयारी में है। वर्तमान में जलस्तर आरएल 822 पहुंच गया है।
कोट
बांध प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भूमि के प्रस्ताव संबंधी वन विभाग की आपत्तियों को दूर कर ऑनलाइन कर दिया गया है। एनओसी मिलने पर पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-चतर सिंह चौहान, प्रभारी अधिकारी पुनर्वास।
सरकार पुनर्वास के नाम ग्रामीणों को गुमराह कर रही है। पहले प्रभावितों का पुनर्वास होना चाहिए था। इसके बाद ही जलस्तर बढ़ाया जाना चाहिए। जलस्तर बढ़ने से गांवों के आसपास दरारें बढ़ने शुरू हो गई है।
-सोहन सिंह राणा, अध्यक्ष बांध प्रभावित संघर्ष समिति।