चंबा (टिहरी)। यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कठिन से कठिन काम भी आसान हो जाता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है थौलधार के क्यूलागी, बरवाल, बमराड़ी, बंडवाल गांव लोगों ने 20 वर्षों सेे ठांगधार-थौलधार मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू न होने पर स्थानीय लोगों ने खुद ही फावड़ा-बेलचा उठाकर सड़क बनानी शुरू कर दी है। दो माह के भीतर लोगों ने चार किमी सड़क पर छोटे वाहनों का आवागमन शुरू कर दिया है।
थौलधार विकास खंड के ठांगधार-थौलधार मोटर मार्ग का निर्माण वन अधिनियम के कारण वर्षों से अधर में लटका हुआ है। राजशाही के जमाने में वन विभाग ने क्यूलागी, बंडवाल गांव, बरवाल गांव के लिए रास्ते का निर्माण किया था। स्थानीय लोग वर्षों से इसी रास्ते का सुदृढ़ीकरण कर ठांगधार-थौलधार मोटर मार्ग निर्माण करने की मांग विभिन्न मंचों से उठाते रहे थे। सड़क नहीं होने के कारण क्षेत्र के बुजुर्गों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
खगर्भवती महिलाएं रुटीन परीक्षण के लिए अस्पताल नहीं पहुंच पाती हैं। ग्रामीणों की मांग पर गत वर्ष लोनिवि से 7.7 मीटर लंबे ठांगधार-थौलधार मोटर मार्ग का सर्वे था, लेकिन चार किमी में वन भूमि और पेड़ों ने अड़ंगा डाल दिया। तब से सड़क निर्माण का कार्य आगे नहीं बढ़ पाया था। ऐेसे में सड़क सुविधा से वंचित ग्रामीणों ने पंचायत बैठक बुलाकर राजशाही के जमाने के पैदल मार्ग का चौड़ीकरण कर सुधारीकरण करने का निर्णय लिया। फिर क्या था ग्रामीणों ने फावड़े और बेलचा उठाकर पैदल रास्ते को चौड़ा कर वाहन चलने लायक बना दिया। इतना ही नहीं ग्रामीण श्रमदान कर सड़क के गड्ढे और पुस्ता लगाने का काम भी कर रहे हैं। ग्रामीणों की मेहनत के कारण अभी तक चार किमी क्षेत्र तक छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। जिला पंचायत सदस्य सरस्वती देवी, प्रधान राजेश भट्ट, पवन सिंह रावत का कहना है कि पैदल मार्ग का चौड़ीकरण कर फिलहाल वाहन चलने लायक सड़क बनाई जा रही है। क्षेत्र के सभी लोग श्रमदान कर सड़क बनाने में सहयोग दे रहे हैं।