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रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए मिलेगा सिर्फ ढाई घंटे

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चंबा (टिहरी)। इस साल सात अगस्त को रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण और भद्रा का संयोग रहेगा। इसके चलते बहन और भाइयों को राखी बांधने के लिए सिर्फ ढाई घंटे का ही शुभ समय मिलेगा। ज्योतिषाचार्य शास्त्रों के अनुसार बहन और भाई दोनों की मंगलमय शांति के लिए शुभ मुहूर्त पर ही राखी बांधने की सलाह दी है।
सावन मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस साल भाई-बहन के प्रेम का पर्व सात अगस्त सोमवार को आ रहा है। इस बार यह पर्व अपने साथ चंद्र ग्रहण और भद्रा को साथ लेकर आ रहा है। इससे सालों बाद ऐसा होगा कि जब बहनों को अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधने के लिए कुछ समय ही मिल पाएगा। भद्रा काल छह अगस्त रात्रि 10 बजकर 8 मिनट से अगले दिन सोमवार सुबह 11 बजकर सात मिनट तक रहेगी। चंद्र ग्रहण रात्रि 10.29 बजे से 12.32 बजे तक रहेगा, लेकिन दोपहर एक बजकर 40 मिनट से चंद्र ग्रहण का सूतक लग जाएगा। शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल और सूतक में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकता है, तो फिर राखी भी नहीं बंध सकती। लिहाजा राखी बांधने का उपयुक्त समय सुबह 11 बजकर 10 मिनट से दोपहर 1 बजकर 40 मिनट तक ही रहेगा। इसे देखते हुए ज्योतिषाचार्य शास्त्रों के अनुसार शुभ मुहूर्त में राखी बांधने की सलाह दे रहे हैं।
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कोट
भद्रा काल और सूतक में कोई भी मंगल कार्य नहीं किए जा सकते हैं, जिस नक्षत्र में ग्रहण लगता है, वह छह महीने तक मलीन हो जाता है। ऐसे में रक्षा सूत्र भी नहीं बांधा जा सकता है। राखी बांधने का उपयुक्त समय सुबह 11 बजकर 10 मिनट से दोपहर 1.40 बजे तक ही रहेगा।
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-पं. उदय शंकर भट्ट, अध्यक्ष, उत्तराखंड विद्वत सभा।

क्या है भद्रा
देव-दानवों के युद्ध में भगवान शिव के शरीर से भद्रा उत्पन्न हुई। दैत्यों के संहार के लिए गर्दभ के मुख और लंबी पूंछ वाली भद्रा को ज्योतिष शास्त्र में सर्पिणी के समान विषैला बताया गया है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने प्राचीन काल से ही भद्रा की अवधि को समस्त मांगलिक कार्यों के लिए निषिद्ध घोषित किया है।
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