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70 लाख के नलकूप को 7 साल से 1.5 किमी नहर का इंतजार

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राजपाल गुसाईं
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कंडीसौड़ (टिहरी)। योजनाएं बनाने में सरकार की प्लानिंग किस तरह विफल हो रही है। इसकी बानगी नगुण पट्टी के ग्राम भंगर में देखी जा सकती है। वहां सरकार ने सिंचाई के लिए वर्ष 2009-10 में लाखों रुपये खर्च कर नलकूप तो बनाया, लेकिन सात साल बाद भी नहर नहीं बना पाए हैं। इससे 70 लाख रुपये की लागत से बनाया गया नलकूप किसी काम नहीं आ रहा है।
थौलधार ब्लॉक के नगुण पट्टी में हाईवे से जुड़े ग्राम भंगर, कंडारगांव और उनियाल गांव की पांच हजार नाली कृषि भूमि की सिंचाई के लिए वर्ष 2010 में भंगर गांव में नलकूल बनाया गया था। पानी की सप्लाई के लिए 100 मीटर पाइप भी बिछाए गए थे, जिससे आठ इंच पानी की टेस्टिंग भी सफल रही। पानी की सप्लाई के लिए बाकायदा बिजली का कनेक्शन भी लिया गया था। सिंचाई के लिए लघु सिंचाई विभाग को सप्लाई टैंक के साथ ही 1.5 किमी नहर बनानी थी, लेकिन सात साल बाद भी नहर नहीं बन पाई है। यही नहीं इतने वर्षों में उपयोग किए बगैर बिजली कनेक्शन का सरचार्ज भी 1.94 लाख रुपये पहुंचने पर ऊर्जा निगम ने अगस्त 2016 में कनेक्शन काट दिया। लघु सिंचाई विभाग को पूछने पर अब अधिकारी कह रहे हैं कि नलकूप विभाग एनओसी देता है, तो वह नहर बनाने को तैयार है। प्रधान राखी देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य मीना देवी, कमल सिंह असवाल, राय सिंह पडियार और अतर सिंह का कहना है कि विभागों का सामंजस्य नहीं होने से सात साल पहले 70 लाख रुपये खर्च कर बनाया गया नलकूप ग्रामीणों के किसी काम का नहीं है। उन्होंने कहा कि जब योजना का लाभ ही नहीं मिल रहा है, तो काश्तकार बिजली के बिल का भुगतान भी क्यों करेंगे।
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नलकूप के लिए बिजली का कनेक्शन लिया गया था, लेकिन बिल भुगतान नहीं होने से नलकूप का कनेक्शन काट दिया गया है। अब बकाया राशि मिलने पर ही फिर से संयोजन दिया जा सकता है।
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-वाईएस तोमर, एई ऊर्जा निगम।

विभाग ने नलकूप बनाने के बाद एनओसी नहीं दी है, जिससे हम वहां अभी तक नहर नहीं बना पाए हैं। एनओसी मिलती है, तो वहां जल्द ही टैंक और नहर का निर्माण कर दिया जाएगा।
- अतुल पाठक, ईई लघु सिंचाई विभाग।
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