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डीसीबी अध्यक्ष पद पर काबिज होने को भाजपाई और कांग्रेसी हुए लामबंद

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नई टिहरी। जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष पद पर काबिज होने के लिए भाजपा-कांग्रेस का खेमा लामबंद हो गया। डीसीबी के आठ संचालक मंडल सदस्यों की ओर से अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चुनौती के बाद यह स्थिति पैदा हुई है। हालांकि भाजपा का एक खेमा अध्यक्ष और संचालक मंडल सदस्यों के बीच बढ़ी दूरियों को पाटने में जुट गया है। लेकिन कांग्रेसी भी मैदान से पीछे हटने को तैयार नहीं है। डीसीबी अध्यक्ष को लेकर दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला रोचक होता जा रहा है। अविश्वास प्रस्ताव के मामले को अधिक तूल न मिले इसके लिए डीसीबी अध्यक्ष रजनीकांत सुरीरा राजधानी देहरादून में डेरा डालकर डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए हैं।
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जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष पद पर 2013 मेें हुुए चुनाव में कांग्रेस ने बाजी मार ली थी, क्योंकि 11 संचालक मंडल सदस्यों में से 9 कांग्रेस खेमे के जीत कर आए थे। इसलिए कांग्रेस को अध्यक्ष पद लपकने में देरी नहीं लगी। इससे पहले अध्यक्ष पद पर भाजपा के घनश्याम नौटियाल काबिज थे, लेकिन डीसीबी अध्यक्ष रजनीकांत सुरीरा ने बीते जनवरी में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। तब से डीसीबी अध्यक्ष पद को लेकर भाजपाइयों और कांग्रेसियों के बीच खींचतान होती आ रही है।
17 जुलाई को संचालक मंडल के आठ सदस्यों ने डीएम को शपथ पत्र सौंपकर डीबीसी अध्यक्ष की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। डीएम को सौंपे आरोप पत्र में संचालक मंडल सदस्यों ने अध्यक्ष को सदन में बहुमत साबित करने की चुनौती दी है। अब गेंद डीएम के पाले में है। डीएम सोनिका का कहना है कि वे इस मामले में शासकीय अधिवक्ता से राय लेकर अग्रिम कार्रवाई करेगी। भाजपा और कांग्रेसी डीएम के स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर नजर गढ़ाकर बैठे हुए हैं। दोनों ही पार्टियों के नेता इस बाजी को किसी भी दशा में हाथ से जाना नहीं देना चाहते हैं।
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