टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) की भूमिका पर बोट संचालकों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने झील में 15 बोट बिना लाइसेंस के संचालित करने, झील किनारे पेयजल, शौचालय, पथ प्रकाश और चैजिंग रूम की सुविधा नहीं होने का आरोप लगाया।
टिहरी झील बोट एसोसिएशन के संरक्षक कुलदीप पंवार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को टाडा के अपर मुख्य कार्याधिकारी चतर सिंह चौहान से मिला। उन्होंने बताया कि दो वर्ष से झील में बोटों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन कोटी कालोनी को छोड़कर एक भी नया बोट प्वाइंट नहीं बनाया है। मानकों को ताक पर रखकर 15 बोट बिना लाइसेंस के संचालित किए जा रहे हैं।
लाइसेंस नहीं मिलने से बोट स्वामी बैंक में ऋण जमा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने बोट लाइसेंस की संख्या सीमित करने, प्रति व्यक्ति 15 रुपये का टैक्स समाप्त करने, बोटिंग प्वाइंटों पर सुरक्षा गार्ड तैनात करने, पथ प्रकाश की व्यवस्था करने, जैस्की का किराया प्रति यात्री 300 रुपये निर्धारित करने की मांग की है।
बोट संचालकों ने एसीओ चौहान को बताया कि चार अप्रैल को बोट यूनियन, व्यापार सभा और स्थानीय लोगों ने झील क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाने, पांच अप्रैल को भंडारा और शाम 8 बजे से रात्रि जागरण करने का निर्णय लिया है। वार्ता में मान सिंह रावत, भूपेंद्र सिंह राणा, मनीष नेगी, दिनेश नेगी, गंभीर सिंह नेगी, रणवीर महर, टाडा के विधि सलाहकार देवेंद्र दुमोगा, पीआरओ नवीन नेगी आदि उपस्थित रहे।