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बादल गरजते ही कांप जाती है रूह

Mon, 24 Jun 2013 05:09 PM IST
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
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बादलों की गरज और हल्की बारिश की बूंद भी लोगों की रात की नींद छीन रही है। रविवार रात को भी पिंडर और अलकनंदा के तट पर बने आवासीय भवनों में लोगों ने रात जागकर काटी है।
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उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज

ब्लाक मुख्यालय पर करीब 20 आवासीय भवन भारी बारिश के चलते पिंडर के उफान में समा चुके हैं। सिमली रोड निवासी महेश खंडूरी के अनुसार रविवार रात को बादलों की गरजना और बिजली के चमकने से जान सांसत में आ गई। गत 17 जून की रात को नदी उनका आंगन बहा ले गई और भवन के कमरों में पानी भर गया।

रविवार 12 बजे से सुबह तक बरामदे में बैठकर नदी के बहाव और बारिश पर नजर टिकाए रखी। इधर बारिश के चलते प्रेमनगर निवासी जीतेंद्र कुमार ने हालांकि अपना आवासीय भवन छोड़ दिया है और किराए पर रह रहे हैं, लेकिन रविवार की रात को हुई बारिश ने जीतेंद्र का चैन छीना लिया।
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रातभर नजरें गड़ाए रखीं
रातभर नदी के बढ़ते पानी पर नजरें गड़ाए रखी। देवतोली के मातबर सिंह तोपाल के अनुसार गत 17 जून को अलकनंदा का पानी उनके मकान तक पहुंच गया था। रविवार रात जब बारिश शुरू हुई, तो फिर न नींद रही और न चैन।

सुबह बारिश बंद होने पर सुकून मिला। सिमली रोड हो या प्रेमनगर, देवतोली नदी तट के नजदीक बने भवन और उनमें रह रहे लोगों के लिए आसमान में बादल किसी भयावह स्थिति से कम नहीं।
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