अल्मोड़ा और पौड़ी में विजिलेंस के सब सेक्टर मैन पावर की वजह से अटक गए हैं। पुलिस मुख्यालय इनके लिए सीओ से लेकर सिपाही तक की नियुक्ति नहीं कर पाया है। अल्मोड़ा में तो ऑफिस का चयन हो गया है, लेकिन पौड़ी में अभी कोई जगह नहीं मिल सकी है। यह स्थिति तब है, जब सात माह पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकारी भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए विजिलेंस को और प्रभावी बनाने की घोषणा की थी।
देहरादून मुख्यालय के अलावा हल्द्वानी में भी विजिलेंस ऑफिस संचालित है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 21 अक्तूबर को पौड़ी और अल्मोड़ा में भी विजिलेंस के सब सेक्टर खोलने की घोषणा की थी। सीएम की व्यक्तिगत दिलचस्पी लिए जाने के कारण सब सेक्टर का शासनादेश जारी होने के साथ सब सेक्टर के लिए मैन पावर का नियतन भी निर्धारित कर दिया गया।
इसके हिसाब से एक सीओ, एक इंस्पेक्टर, पांच दारोगा और चार सिपाही एक सेक्टर में तैनात होने है। बल का यह मामला पुलिस मुख्यालय में उलझा है। पहले तो अर्द्धकुंभ में पुलिस बल की तैनाती होने के कारण उलझा रहा। इसके बाद प्रदेश में 56 दिन के चले सत्ता संग्राम में इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने को ज्यादा तवज्जों नहीं दी गई। हालांकि सिविल पुलिस से काफी कर्मचारियों ने विजिलेंस में जाने का विकल्प भरा है।
विजिलेंस के अल्मोड़ा और पौड़ी में सब सेक्टर खोलने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही बल का आवंटन होने के साथ सब सेक्टर अस्तित्व में आ जाएंगे। अल्मोड़ा में ऑफिस की जगह फाइनल हो गई है। पौड़ी में भी जल्द ही ऑफिस तय हो जाएगा।
- अशोक कुमार, डायरेक्टर विजिलेंस