उत्तराखंड में मॉडल स्कूल खोलने के मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुरूआत में ही बड़ा घपला सामने आया है। सात करोड़ रुपये की लागत से इन स्कूलों के लिए क्रय किए जा रहे सामान में शिक्षा विभाग ने बगैर टेंडर के जिला शिक्षा अधिकारियों को डेस्क और बैंच में एक कंपनी का बोर्ड लगाने के निर्देश दे दिए। जिससे विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश के हर ब्लॉक में पांच मॉडल स्कूल खोलने के निर्देश दिए हैं। इसमें दो स्कूल प्राथमिक, एक जूनियर हाईस्कूल और दो माध्यमिक विद्यालय खोले गए हैं।
बगैर टेंडर कंपनी का बोर्ड लगाने के निर्देश
प्रदेशभर में शुरूआत में खुले 475 मॉडल विद्यालयों के लिए हाल ही में शासन की ओर से सात करोड़ रुपये गणित, विज्ञान किट, ग्रीन बोर्ड, डिस्प्ले बोर्ड और फर्नीचर के लिए जारी किए गए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को 31 मार्च 2016 से पहले इन स्कूलों के लिए जारी की गई धनराशि व्यय करने के निर्देश दिए गए हैं।
बेसिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी की ओर से धनराशि व्यय करने के संबंध में जो निर्देश दिए गए हैं उसमें स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों के लिए क्रय किए जाने वाली डेस्क और बैंच पर एक्शन टेसा कंपनी का बोर्ड लगा होना चाहिए। सवाल यह है कि जब किसी कंपनी को इस कार्य के लिए अनुबंधित ही न किया गया हो और कंपनी टेंडर प्रक्रिया में अव्वल न रही हो तो उसे अधिकारी इस तरह के निर्देश जारी कर कैसे लाभ पहुंचा सकते हैं।