मौसम की मार काश्तकारों पर भारी पड़ रही है। रबी की फसलें जहां सूखे से नष्ट हुई, वहीं खरीफ की फसलों को मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि तबाह कर रही है। 23 मई से अब तक एक हजार नाली से अधिक कृषि भूमि बहने, मलबे से दबने और ओलावृष्टि से बर्बाद हो चुकी है।
जिले में करीब 10 हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल में बोई गई धान व अन्य फसलें प्री-मानसून की भेंट चढ़ रही हैं। 23 मई, 29 मई और 2 जून को अलग-अलग क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से जखोली विकासखंड के मवाण गांव, जैली, कंडाली, तैला, वाड, पाली, पंदरोला, शीशों, कुमड़ी और रौठिया में करीब साढ़े चार सौ नाली कृषि भूमि फसल सहित गदेरों के उफान में बह गई थी।
अगस्त्यमुनि ब्लाक के जगोठ और मखोली गांव में 100 नाली कृषि भूमि फसल सहित नष्ट हो गई। ऐटा, सिलकोट, गिवाला, सौड़ी, गबनी गांव, चंद्रापुरी गांव में भी काश्तकारों की करीब डेढ़ सौ नाली और बसुकेदार तहसील में दो सौ नाली भूमि पर बोई गई धान व अन्य फसलें ओलावृष्टि से चौपट हो चुकी है। दोपहर बाद हो रही कुछ देर की मूसलाधार बारिश खेतों को तबाह कर रही है, जिससे काश्तकार बेहाल हैं।
कैसे होगी धान रोपाई
जिले में करीब 45 फीसदी सिंचिंत भूमि पर धान की रोपाई होनी है, लेकिन अतिवृष्टि से सिंचाई नहरों के क्षतिग्रस्त होने से खेतों को पानी नहीं मिल पा रहा है। जिले में सिंचाई और लघु सिंचाई विभाग की मदोला, घिंघराण, ऐटा, सिलकोट, गिवाला, सौड़ी, गबनी गांव, चंद्रापुरी, लिस्वाल्टा, पुजारगांव, भटवाड़ी, बग्जीवाला, खंडकधार, पुलन, मवाणगांव, शीशों-बंदरतोली नहरें क्षतिग्रस्त होने से करीब दो हजार नाली सिंचित भूमि को पानी नहीं मिल रहा है।
मदोला के ग्राम प्रधान बीरेंद्र सिंह नेगी और मवाणगांव की ग्राम प्रधान रेखा देवी का कहना है कि ग्रामीणों की अधिकांश खेती सिंचित है। नहरों के क्षतिग्रस्त होने से खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। जबकि रोपाई के लिए तैयार धान की पौधे भी खेतों में सूख रही हैं।
मूसलाधार बारिश व अतिवृष्टि से जिले के कई क्षेत्रो में खेती को पहुुंचे वृहद क्षति की सूचना है। तहसील स्तर पर राजस्व पुलिस की ओर से गांवों का निरीक्षण कर फसल व खेती को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। जिला स्तर पर अभी रिपोर्ट नहीं मिली है।
- विजय देवराड़ी, मुख्य कृषि अधिकारी रुद्रप्रयाग