केदारनाथ यात्रा को सुलभ और सरल बनाने के मकसद से स्वीकृत रामबाड़ा-केदारनाथ रोपवे एक दशक बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाया है। 2009 में यूडेक और उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने इसके निर्माण के लिए टेंडर भी आमंत्रित किए थे। बावजूद इसके इस रोपवे का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
भगवान शिव के 11वें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को गौरीकुंड से केदारनाथ तक 16 किमी से अधिक पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। ऑक्सीजन की कमी से रामबाड़ा से धाम तक का रास्ता तय करना मुश्किल है। समस्या के निस्तारण के लिए वर्ष 2005 में रामबाड़ा से केदारनाथ तक रोपवे निर्माण की स्वीकृति मिली थी।
यूडेक (उत्तरांचल इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलेपमेंट कंपनी) ने योजना का सर्वेक्षण तथा निर्धारित क्षेत्र में फिजिबिलिटी टेस्ट किया। उसके बाद करीब 3.50 किमी लंबे रोपवे के निर्माण के लिए अनुमानित लागत करीब 70 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
तत्कालीन प्रदेश सरकार ने योजना का निर्माण पीपीपी मोड (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) में कराने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 2009 में रोपवे निर्माण के टेंडर आमंत्रित किए गए थे। निर्माण कंपनियों की दिलचस्पी नहीं लेने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
16/17 जून 2013 की आपदा के बाद पुन: प्रदेश प्रदेश सरकार को केदारनाथ के लिए रोपवे निर्माण की याद आई। फरवरी 2014 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से सीएम रावत केदारघाटी के अपने 25 से अधिक दौरों में अधिकांश रामबाड़ा-केदारनाथ रोपवे के निर्माण की बात कह चुके हैं।
यही नहीं मुख्य सचिव रहते हुए मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने तो अक्तूबर 2015 से रोपवे निर्माण की बात भी कही थी। हालांकि इस दिशा में आज तक एक नई ईट तक नहीं रखी गई है।
रामबाड़ा-केदारनाथ रोपवे निर्माण को लेकर शासन स्तर से इस विषय पर अभी कोई निर्णय लिया गया है। केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों को पूरा करना और जरूरी सुविधाएं जुटाना प्राथमिकता है। आगे चरणबद्घ तरीके से अन्य कई कार्य किए जाने हैं।
- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग