मूसलाधार बारिश और अतिवृष्टि से जिले में 43 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त होने से 80 से अधिक गांवों में जल संकट हो गया है। लोग दो किमी दूर प्राकृतिक स्रोतों से वाहनों की मदद से अपने और मवेशियों के लिए पानी जुटा रहे हैं। 20 मई से शुरू हुए बारिश और अतिवृष्टि से जहां ऊखीमठ नगर, ऊखीमठ-फाफंज, ऊखीमठ-मंगोलचारी पेयजल योजनाएं कई स्थानों पर टूटी हैं।
वहीं सेमला और भींगी की पेयजल योजनाएं पूर्णरूप से ध्वस्त हो गई हैं। यहां ग्रामीण बरसाती गदेरे का पानी पीने को मजबूर हैं। इधर, जखोली ब्लाक के मवाण गांव, चाका, जैली, कंडाली तथा अगस्त्यमुनि ब्लाक में मदोला, भुनका, कोठगी आदि पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हैं।
यहां ग्रामीण दूरस्थ स्रोतों से पानी जुटा रहे हैं। जनपद में 30 विभागीय और 13 ग्राम पंचायतों की योजनाओं को क्षति पहुंची हैं। मवाणागांव के ग्राम प्रधान रेखा देवी का कहना है कि पेयजल योजना 15 दिन से टूटी है।
ग्रामीण गदेरे का गंदीला पानी पी रहे हैं, जिससे बीमारी का खतरा बना हुआ है। सेमला के वन पंचायत सरपंच देवेंद्र सिंह और केएन त्रिवेदी ने बताया कि 28 परिवार 800 सौ मीटर दूर से पानी जुटा रहे हैं। स्टोर टैंक ध्वस्त होने से स्थिति गंभीर हो गई है।
बारिश और अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त 43 योजनाओं को क्षति पहुंची है। सड़क से लगे गांवों में टैंकर से पेयजल सप्लाई की जा रही है। टूटी योजनाओं की स्थायी मरम्मत के लिए शासन को 1, 27, 70 हजार का इस्टीमेट भेजा जा चुका है।
- सत्येंद्र गुप्ता, ईई जलसंस्थान, रुद्रप्रयाग