मेरे पिता ने कभी भी मुझे या मेरी बहनों पर हाथ नहीं उठाया। कभी-कभी डांटते जरूर थे। मां के साथ आठ दिन से लगातार गाली-गलौज और मारपीट हो रही थी। कारण क्या था मुझे नहीं पता.. । ये शब्द अगस्त्यमुनि ब्लाक के केड़ा मल्ला गांव निवासी मृतक रमेश लाल व गीता देवी के बड़े बेटे अजय के हैं। उन्हें अपनी दो बहनों मनीषा और शिवानी के साथ जहां पिता को खोने का गम है, वहीं मां के जेल जाने से भी गमजदा हैं।
छह वर्षीय शिवानी को यह नहीं पता कि जेल क्या होती है। वह कहती है मेरी मां जल्द आएगी। तीनों बच्चे अपने घर के आंगन में माता-पिता के बगैर गुमशुम हैं। घर के अंदर और बाहर सन्नाटा छाया है। एक माह पहले ननिहाल से लौटे अजय का कहना है कि उसका मामा अहमदाबाद में नौकरी करता है। हालांकि कुछ समय से वह घर पर ही है। इस 14 वर्षीय बच्चे का कहना है कि उसे नहीं पता उसके माता-पिता के बीच क्यों लड़ाई होती थी।
पिछले पांच वर्ष से उसका और उसकी दो बहनों का जीवन घर में होती गाली-गलौज और मारपीट के बीच गुजरा है। मनीषा का कहना है कि पिता पुचकारते भी थे तो डांटते भी थे, लेकिन कभी भी उन्होंने पीटा नहीं। हां, रविवार को भाई के स्कूल के कागज फाड़ दिए थे, जिस पर मां गुस्सा हो गई थी।
आए दिन गाली-गलौज और मारपीट की वजह शायद आर्थिकी तंगी रही हो या फिर अन्य कारण। ये मृतक और उसकी पत्नी को ही मालूम होगा, लेकिन इस हादसे के बाद तीन मासूम जिदंगियां बिखर सी गई हैं। दो दिन से वे दादा के साथ रह रहे हैं और अपने चचेरे संगे संबंधियों के यहां खना खा रहे हैं।
मृतक रमेश का पिता बाला लाल मानसिक रूप से कमजोर हैंद्घ वह बोल नहीं पाते हैं। उधर, बच्चों के ननिहाल भुनका (पोखरी) में भी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। नाना का देहांत हो चुका है। नानी, एक मौसी और एक मामा हैं। मृतक के चचेरे भाई जयवीर लाल का कहना है कि जितना हो सकेगा बच्चों की परवरिश करेंगे।
मायके-ससुराल से नहीं आया कोई
रुद्रप्रयाग। आरोपी गीता देवी 14 दिन की न्याययिक हिरासत में पुरसाड़ी जेल में है। अब तक उससे मिलने मायके व ससुराल से कोई नहीं पहुंचा है। इधर, थानाध्यक्ष डीएस रावत का कहना है कि रिमांड के दौरान उसके परिजन जमानत की अर्जी दे सकते हैं। लेकिन अब तक इस संबंध में कोई नहीं आया है।