तिलवाड़ा। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब नौ किमी की दूर तिलवाड़ा में भारी पेयजल संकट बना हुआ है। लोग मंदाकिनी नदी से पानी ढोकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
दो दशक पुरानी रामपुर-तिलवाड़ा योजना देखरेख के अभाव में जर्जर हो रही है। योजना पर पर्याप्त पानी होने के बावजूद सप्लाई पूरी नहीं हो पाने से तिलवाड़ा व सुमाड़ी की करीब छह हजार आबादी को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। दूसरी तरफ वर्ष 2007-08 में स्वीकृत लस्तर-सुमाड़ी-तिलवाड़ा पेयजल योजना पर छह करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। यही नहीं, तल्ला नागपुर पेयजल योजना से भी तिलवाड़ा के लिए पानी की व्यवस्था नहीं होने से जनता भारी पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीण राजेंद्र सिंह, प्रदीप सिंह आदि का कहना है कि विभागीय लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से लोग बूंद-बूंद पानी से जूझ रहे हैं।
पिछले सप्ताह मुख्य बाजार में बिजली के पोल ढहने के बाद से मंदाकिनी नदी से कस्बे को पेयजल सप्लाई करने वाली लिफ्ट पपिंग योजना भी बंद पड़ी है, जिससे हालात गंभीर हो गए हैं। बावजूद इसके ऊर्जा निगम और जलनिगम समस्या के निस्तारण के लिए कोई प्रयास करते नजर नहीं आ रहे हैं।
तिलवाड़ा के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए लस्तर-सुमाड़ी-पेयजल योजना विवाद के कारण सुमाड़ी तक ही बन पाई है। 99 लाख की इस योजना पर 93 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। विवाद निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं। - एसके बरनवाल, ईई जलनिगम रुद्रप्रयाग