रुद्रप्रयाग। केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में दूरस्थ गांवों में मतदान को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होने के बाद भी मतदाताओं ने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर उत्साह से अपना वोट दिया। उनका कहना था कि वह सुविधाओं के लिए मतदान कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में उनकी समस्याएं दूर हो सके।
विस क्षेत्र के सबसे दूरस्थ पोलिंग बूथ गौंडार में 74, तोषी में 72, चिलौंड में 74 और तरसारी में 70 फीसदी मतदान हुआ। इन गांवों में उम्मीद से अधिक मतदान हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोकतंत्र में भाग लिया है। यह सभी गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। यहां के ग्रामीणों को अपने घरों से सड़क तक पहुंचने के लिए 4 से 7 किमी पैदल दूरी नापनी पड़ रही है। बीमार व गर्भवती को डंडी पर बिठाकर पैदल मार्ग से मीलों चलकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
स्थिति यह है कि गौंडार गांव के स्कूली बच्चों को इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए रांसी, राऊंलेक, मनसूना और ऊखीमठ तक की दौड़ लगानी पड़ती है। इन हालात में राऊंलेक, मनसूना व ऊखीमठ में उन्हें किराए का कमरा लेकर रहना पड़ता है। उधर, चिलौंड गांव के स्कूली बच्चों को 9व 10वीं की पढ़ाई के लिए दोतरफा 10 किमी और इंटर की पढ़ाई के लिए दोतरफा 12 किमी पैदल चलना पड़ता है। वहीं मोबाइल पर बात करने के लिए ग्रामीणों को अपने घरों से 100 से 200 मीटर दूर ऊंचाई वाले स्थानों पर जाना पड़ता है। यही स्थिति तोषी गांव में भी है। इसके बावजूद ग्रामीणों में लोकतंत्र के प्रति आस्था कायम है।
ग्राम प्रधान जगत सिंह रावत, वीर सिंह पंवार, पूर्व ग्राम प्रधान मोहन सिंह राणा, अभिषेक पंवार, अरविंद पंवार, जगतराम सेमवाल सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद से गांवों को सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने की मांग होती आ रही है। गांवों को सुविधाओं से जोड़ने को लेकर वह मतदान में शामिल हो रहे हैं, कि कोई न कोई जनप्रतिनिधि उनकी पीड़ा को देखे और जरूरी कार्रवाई करे।
विनय
जारी