यहां एकल पेयजल योजना के लिए एक लाख 40 हजार रुपये की धनराशि अवमुक्त होने के बावजूद योजना धरातल पर नहीं उतरी। योजना के लिए खरीदे गए पाइप और अन्य सामग्री ग्राम पंचायत अधिकारी ने बेच डाली। हैरत की बात तो यह है कि दो मदों में मिली धनराशि को ठिकाने लगाने के बावजूद विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने न तो उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत कराने की जरूरत समझी और न ही संबंधित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। अब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मामले खुलासे का खुलासा होने के विभाग में अफरा-तफरी मची है।
अगस्त्यमुनि ब्लाक में तैनात एक ग्राम पंचायत विकास अधिकारी द्वारा वर्ष 2006-07 में क्षेत्र पंचायत सदस्य के प्रस्ताव पर स्वीकृत मवाणा-सौड़ एससी बस्ती के लिए एकल पेयजल योजना के लिए जिला योजना में 90 हजार रुपये स्वीकृत कराए गए। मद से धनराशि अवमुक्त कर दी गई। 12वें वित्त में इसी वीडीओ ने पुन: सौड़-मरोड़ा एकल योजना के लिए 50 हजार और प्राप्त किए, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतरी। मामले में 2015 में स्थानीय निवासी रिटायर्ड तहसीलदार डीएल टम्टा ने संबंधित विभाग से बस्ती के लिए स्वीकृत पेयजल योजना के बारे में जानकारी मांगी, तो विभाग ने जानकारी देने से इंकार कर दिया।
तीन मार्च 2016 को टम्टा ने आरटीआई में विभाग से योजना के बारे में सूचना मांगी, लेकिन विभाग ने फिर भी जानकारी नहीं दी। सूचना नहीं देने पर राज्य सूचना आयोग द्वारा तत्कालीन बीडीओ डीएस मेहरा पर 25 हजार का जुर्माना भी लगाया गया। इसके बाद अपीलकर्ता टम्टा की ओर से पुन: एक अक्तूबर 2016 को विभाग से आरटीआई में इस संबंध में सूचना मांगी गई।
इस पर, विकास विभाग अगस्त्यमुनि द्वारा बताया गया कि मवाणा-सौड़/मरोड़ा-सौड़ एससी बस्ती के लिए स्वीकृत पेयजल योजना का मौके पर निर्माण हुआ ही नहीं है। दो मदों में अवमुक्त की गई 1.40 लाख की धनराशि से खरीदे गए पाइप और अन्य सामग्री ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा बेच दी गई।
इनका कहना है --
सरकारी योजनाओं के प्रति किसी भी विभाग के अधिकारी/कर्मचारी द्वारा किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीडीओ से मामले की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। मामले में शामिल दोषियों को किसी भी हाल में नहीं बख्शा जाएगा।
-- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
मैने कुछ दिन पूर्व ही कार्यभार संभाला है, इसलिए मुझे जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो यह सरकारी योजना को लेकर गंभीर अपराध है। मामले की त्वरित जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डीपी रतूड़ी, खंड विकास अधिकारी, अगस्त्यमुनि