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मेरठ, हरियाणा के इंस्टिट्यूट में दिखाया गया था यूएसनगर के छात्रों का फर्जी दाखिला 20-06-58

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बरिंदरजीत सिंह, एसएसपी। - फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में एसआईटी ने मेरठ स्थित ऋषि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और रेवाड़ी (हरियाणा) के ब्राइटलैंड कॉलेज के खिलाफ जसपुर और बाजपुर थाने में केस दर्ज कराया है। दोनों इंस्टीट्यूट ने यूएसनगर के छात्रों का फर्जी दाखिला अपने संस्थानों में कराकर लाखों रुपये की छात्रवृत्ति हड़पी गई थी। आधा दर्जन अज्ञात बिचौलियों के खिलाफ भी एसआईटी ने केस दर्ज कराया है।
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बृहस्पतिवार को अपने दफ्तर में घोटाले का खुलासा करते हुए एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने बताया कि छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए आईजी संजय गुंज्याल के निर्देशन में एसआईटी का गठन किया गया था। एसपी सिटी देवेंद्र पींचा के नेतृत्व में जांच कर रही एसआईटी ने समाज कल्याण विभाग से 2011 से लेकर 2018 तक छात्रवृत्ति वितरण संबंधी दस्तावेज लिए।
जांच में पता चला कि मेरठ के प्रतापपुर स्थित ऋषि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और रेवाड़ी (हरियाणा) स्थित ब्राइटलैंड कॉलेज में यूएसनगर के बाजपुर और जसपुर तहसील के छात्रों का दाखिला कराया गया है। एसआईटी ने दाखिला लेने वाले छात्रों से भी पूछताछ की, जिसमें छात्रों ने उनका फर्जी दाखिला उक्त संस्थानों में कराए जाने की पुष्टि की।
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दस्तावेजों और छात्रों के बयानों से मिले साक्ष्यों के आधार पर ऋषि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के खिलाफ बाजपुर थाने में और ब्राइटलैंड कॉलेज के खिलाफ जसपुर थाने में केस दर्ज कराया गया है। फर्जीवाड़े में शामिल करीब आधा दर्जन बिचौलियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
तीन चरण में एसआईटी घोटाले की जांच कर रही है। पहले चरण में एसआईटी प्रदेश से बाहर स्थित शिक्षण संस्थानों में जांच कर रही है। इसके बाद प्रदेश के भीतर और तीसरे चरण में जिले के अंदर उन शिक्षण संस्थानों की जांच की जाएगी, जिनमें छात्रों का दाखिला कराया गया या उनके नाम से छात्रवृत्ति ली गई।
इन हथकंडों से दिया घोटाले को अंजाम
रुद्रपुर। घोटाले को अंजाम देने के लिए छात्रों को दूसरी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेज लिए गए और इन्हीं दस्तावेजों से उनका फर्जी दाखिला दिखाकर छात्रवृत्ति हड़प ली।
कुछ मामलों में पूर्व में अध्ययनरत छात्रों को छात्रवृत्ति दिलाने का झांसा देकर उनसे शैक्षिक, जाति व स्थायी निवास आदि प्रमाण पत्र लिए गए। सामान्य वर्ग के छात्रों के कूटरचित दस्तावेज बनाकर उन्हें एससी/एसटी दिखाकर फर्जीवाड़ा किया गया। अधिकांश छात्रों के बयान से पता चला कि उन्होंने उस कॉलेज में कभी प्रवेश लिया ही नहीं जहां उनके नाम से छात्रवृत्ति हड़पी गई है।
समाज कल्याण, शिक्षण संस्थान व दलालों की तिकड़ी ने हड़पी 70 लाख की छात्रवृत्ति
धन सिंह बिष्ट
रुद्रपुर। करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले को समाज कल्याण विभाग, शिक्षण संस्थान और दलालों की तिकड़ी ने बड़े ही सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। घोटाले की जांच के लिए एसआईटी ने जसपुर और बाजपुर तहसील के 236 छात्रों से पूछताछ की। इनमें 200 छात्रों का फर्जी दाखिला कराए जाने का खुलासा हुआ और इन फर्जी दाखिलों से घोटालेबाजों ने 70 लाख रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति हड़प ली।
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के सामने घोटाले को लेकर कई तथ्य उजागर हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि घोटाले को अंजाम देने में मुख्य भूमिका दलालों ने निभाई और दाखिला कराने वाले शिक्षण संस्थानों व समाज कल्याण विभाग की भी इसमें मिलीभगत रही। दरअसल घोटाले की शुरुआत वर्ष 2011-12 में ही हो गई थी। वर्ष 2014 के बाद ऑनलाइन छात्रवृत्ति वितरण व्यवस्था होने के बाद कई ऐसे छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति ली गई, जिनका संबंधित शिक्षण संस्थान में पंजीकरण ही नहीं था।
इस पूरे घोटाले में निजी शिक्षण संस्थानों से जुड़े दलाल छात्र-छात्राओं को निशुल्क व्यवसायिक कोर्स कराने का लालच देकर उनके दस्तावेज जमा करते थे और इन्हीं दस्तावेजों से शिक्षण संस्थानों में उनका दाखिला दिखाते थे। हर दलाल को छात्र के हिसाब से शिक्षण संस्थान से कमीशन मिलता था।
इसलिए वह पूरे प्रदेश के अनुसूचित जाति-जनजाति वाले क्षेत्रों में क्षेत्रों में घूमकर छात्र-छात्राओं से दस्तावेज लेते थे। कई मामलों में छात्रों को अपने झांसे में लेने के लिए दलालों द्वारा उन्हें शिक्षण संस्थानों का भ्रमण भी कराया गया। कुछ मामलों में अधिकांश छात्र परीक्षा में अनुपस्थित दर्शाए गए लेकिन समाज कल्याण विभाग के अधिकारी आंख मूंदकर उनके नाम से छात्रवृत्ति की रकम शिक्षण संस्थानों को देते रहे। और एक ही छात्र के नाम से तीन साल तक छात्रवृत्ति आवंटित होती रही।
बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध, जांच में जुटी एसआईटी
रुद्रपुर। छात्रवृत्ति घोटाले में बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध है। आम तौर पर देखा जाए तो बैंक में उपभोक्ता के हस्ताक्षर न मिलने पर बैंक कर्मचारी उपभोक्ता को रकम का भुगतान नहीं करते। लेकिन छात्रवृत्ति घोटाले में अधिकांश शिक्षण संस्थानों ने कैंपस में ही संचालित बैंक शाखाओं में छात्रों के खाते खुलवाए।
छात्रों के खाते शिक्षण संस्थान संचालित कर सकें इसके लिए खातों में एक ही मोबाइल नंबर दर्शाया गया। इसके चलते छात्रों के खाते से सीधे कॉलेज संचालकों के खातों में छात्रवृत्ति की राशि स्थानांतरित होती रही। छात्रों के खातों में छात्रवृत्ति लेनदेन के अलावा और किसी तरह की एंट्री भी नहीं है। इससे स्पष्ट है कि छात्रवृत्ति की रकम को ठिकाने लगाने में बैंकों की मिलीभगत भी रही।
एसआईटी का नोटिस पहुंचा तो पता चला छात्रवृत्ति का
रुद्रपुर। घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने जब समाज कल्याण विभाग से मिले दस्तावेजों की जांच के बाद छात्रों से पूछताछ के लिए उन्हें नोटिस भेजा तो अधिकांश छात्रों को उनके छात्रवृत्ति लेने का पता चला।
कुछ छात्र तब चौंके जब उन्हें सामान्य वर्ग का होने के बाद भी एससी/एसटी दर्शाया गया था। दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षरों से जब छात्रों के हस्ताक्षरों का मिलान किया गया तो वह भी फर्जी निकले और भरे गए आवेदनों में भी कई छात्रों के हस्तलेख का मिलान ही नहीं हो पाया।
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए फिलहाल छात्रों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिसमें उक्त फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। साथ ही छात्रवृत्ति रकम के लेनदेन में कुछ बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध है जांच के बाद बैंकों के खिलाफ भी केस दर्ज किया जाएगा। समाज कल्याण विभाग की भूमिका भी जांची जा रही है। - देवेंद्र पींचा एसपी सिटी/एसआईटी प्रभारी।
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