तुंगनाथ धाम में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के बावजूद धाम में इस वर्ष दुगनी संख्या में यानी 12,650 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे। मंदिर समिति के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि धाम में बिजली, पानी और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं हों तो तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।
सेंचुरी एरिया होने के कारण ऊर्जा निगम धाम में बिजली नहीं पहुंचा पा रहा है। पेयजल सुविधा का हाल यह है कि चोपता से लेकर मंदिर तक साढ़े तीन किमी मार्ग पर पानी नहीं है। मंदिर के लिए भी आधा किमी दूर से पानी जुटाना पड़ता है।
जलसंस्थान दो वर्ष में योजना का खाका ही तैयार नहीं कर पाया है। धाम की सुरक्षा को लेकर भी शासन, प्रशासन और बीकेटीसी प्रबंधन गंभीर नहीं हैं। छह वर्ष पूर्व तुंगनाथ के मुख्य मंदिर से छत्र चोरी हो चुके हैं। पिछले वर्ष भी धाम में संचालित दुकानों के ताले टूटे मिले थे। इसके बाद भी यात्राकाल में भी यहां सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो पाई।
सिर्फ दो होमगार्ड जवानों के सहारे पूरी यात्रा चली। शौचालय की भी यहां कोई व्यवस्था नहीं हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए मंदिर समिति द्वारा बनाया गया प्रतीक्षालय भी जर्जर बना हुआ है, जो कभी भी ढह सकता है।
मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित का कहना है कि तहसील और जिला प्रशासन को समस्याओं के बारे में अवगत कराने पर भी जरूरी इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। मठापति राम प्रसाद मैठाणी और मुख्य पुजारी मुकेश मैठाणी का कहना है कि आपदा के बाद धाम में जरूरी सुविधाओं को लेकर सरकार द्वारा कई बातें कहीं गई, लेकिन तीन वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस है।