तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठान के साथ सोमवार दोपहर साढ़े बारह बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। इस मौके पर पांच सौ से अधिक श्रद्धालु मौजूद थे। भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली अपने प्रथम पड़ाव चोपता पहुंच गई है। नौ नवंबर को भगवान तुंगनाथ अपने शीतकालीन गद्दी स्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में विराजमान होंगे।
तुंगनाथ धाम में प्रात: सात बजे से विशेष-पूजा अर्चना शुरू हो गई थी। पुजारी मुकेश मैठाणी एवं चंद्रबल्लभ मैठाणी ने मुख्य मंदिर सहित भूतनाथ मंदिर, भैरवनाथ, वन देवियों, रुद्रनाथ, पार्वती देवी एवं नंदी पंच केदार की पूजा-अर्चना की गई।
इसके बाद शुभ लग्न में मंदिर के मठापति राम प्रसाद मैठाणी ने गर्भगृह में प्रवेश किया। यहां पुजारी प्रकाश मैठाणी, अतुल मैठाणी, जयकृष्ण मैठाणी और केवलानंद मैठाणी द्वारा मठापति से भगवान का दान करवाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और शिव स्तुति के बीच पुष्प, अक्षत, घी, मक्खन एवं फलों के साथ पूजा सामग्री से स्वयंभू लिंग को समाधि दी गई। इसके बाद भगवान की चल विग्रह डोली को मंदिर से बाहर लाया गया और पार्वती मंदिर के सम्मुख विराजमान किया गया।
इस मौके पर डोली का भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान की चल विग्रह डोली ने मुख्य मंदिर और भूतनाथ मंदिर की तीन परिक्रमा कर धाम में मौजूद भक्तों को आशीर्वाद दिया। इसके उपरांत डोली ने अखोड़ी एवं हुड्डू गांव के हक-हकूकधारी जमाणियों (चल विग्रह डोली को ले जाने वाले) के सहयोग से शीतकालीन गद्दी के लिए प्रस्थान किया।
इस दौरान मंदिर के थौर भंडारी, मंदिर समिति के अधिकारी/कर्मचारी और पंच पुरोहितों की मौजूदगी में तुंगनाथ धाम में मुख्य मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। इस मौके पर पूर्व विधायक आशा नौटियाल, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, केदारनाथ के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग, केएस नेगी, पीएस राणा, एमएन भट्ट, रमेश नौटियाल, बीबी सेमवाल आदि मौजूद थे।