तुंगनाथ घाटी के बणतोली में चल रहा शिव महापुराण एवं महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया है। इसके बाद भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली अपने अंतिम पड़ाव भनकुंड के लिए रवाना हुई। शनिवार को भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली भनकुंड से शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी।
तुंगनाथ घाटी की छह ग्राम पंचायतों के 11 गांवों की ओर से आयोजित 11 दिवसीय महायज्ञ में 21 विद्वान ब्राह्मणों ने क्षेत्र की समृद्धि एवं खुशहाली के लिए आहुतियां डाली। पूर्णाहुति पर विभिन्न देवी-देवता ने पश्वा रूप में अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। महापुराण के दौरान व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य लंबोधर प्रसाद मैठाणी ने भक्ति व वैराग्य ज्ञान, पार्वती उत्पत्ति, गणेश उत्पत्ति, सती वृतांत, पार्वती-शिव विवाह, कार्तिकेय उत्पत्ति, गणेश पूजा प्रसंग एवं शिव पुराण महात्म्य कथाओं का वर्णन किया।
शिव महापुराण एवं महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देकर शाम चार बजे अपने अंतिम पड़ाव भनकुंड के लिए रवाना हुई। इस मौके पर पूर्व विधायक आशा नौटियाल, नगर पंचायत अध्यक्ष रीता पुष्पवाण, जिला पंचायत सदस्य मीना पुंडीर, तुंगनाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट, संरक्षक उर्वी दत्त सेमवाल, केशर सिंह नेगी, यशवंत नेगी, नंदन सिंह रावत, शशि सेमवाल, आचार्य माहेश्वर प्रसाद मैठाणी, चंद्रबल्लभ मैठाणी, मुकेश मैठाणी, मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित आदि उपस्थित थे।