पंचकेदार में द्वितीय मद्महेश्वर के कपाट 20 नवंबर और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट चार नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ और मर्कटेश्वर मंदिर मक्कू में आचार्यगणों ने पंचांग गणना से कपाट होने की तिथि व समय तय किया है। वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट परंपरानुसार भैयादूज के पावन पर्व पर आगामी तीन नवंबर को सुबह 8.30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
शनिवार को विजयदशमी के पावन पर्व पर पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में आचार्य यशोधर मैठाणी ने पंचांग गणना के आधार पर द्वितीय केदार भगवान मद्मेश्वर के कपाट बंद होने की तिथि तय की। पंचांग गणना के आधार पर द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट 20 नवंबर को बंद किए जाएंगे।
इसी दिन बाबा मद्महेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली रात्रि प्रवास के लिए गौंडार पहुंचेगी। 21 को डोली रांसी व 22 को गिरिया गांव में प्रवास करेगी और 23 को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए विराजमान हो जाएगी।
उधर, मर्कटेश्वर मंदिर मक्कू में पंचांग गणना से तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि तय की गई। आचार्य भारत मैठाणी ने पंचांग गणना कर तिथि तय की। पंचांग गणना के हिसाब से चार नवंबर को तुंगनाथ के कपाट बंद किए जाएंगे। इसी दिन आराध्य की चल उत्सव विग्रह डोली अपने मूल मंदिर से शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान करते हुए चोपता पहुंचेगी।
पांच व छह नवंबर को डोली भनकुन गुफा में प्रवास करेगी और सात नवंबर को भगवान तुंगनाथ छह महीने की शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए मर्कटेश्वर मंदिर मक्कू में विराजमान हो जाएंगे। इस मौके पर मंदिर के मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी, आचार्य मुकेश मैठाणी, प्रबंधक बलवीर सिंह नेगी, उमादत्त विनोद मैठाणी, भंडारी जीतपाल, माहेश्वर प्रसाद आदि थे।