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हिमालय जैसा कोई और स्थान नहीं: मोरारी बापू

Fri, 23 Oct 2026 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
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हिमालय जैसा कोई और स्थान नहीं: मोरारी बापू
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- केदारनाथ में राम कथा के साथ मोरारी बापू की भारत स्वस्तिक यात्रा का पहला चरण संपन्न

संवाद न्यूज एजेंसी

रुद्रप्रयाग। कन्याकुमारी से केदारनाथ तक आई भारत स्वस्तिक यात्रा का पहला चरण संपन्न हो गया है। केदारनाथ में संत मोरारी बापू ने रामकथा से बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म और अद्वैत वेदांत दर्शन को पुर्नजीवित करने में ऐतिहासिक कार्य किए है।

उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार के लिए चार मठों की स्थापना की। उत्तर में ज्योर्तिमठ, दक्षिण में श्रृंगेरी शारदा पीठ, पूर्व में गोवर्धन मठ पुरी और पश्चिम में द्वारका पीठ की स्थापना की। इसके साथ ही देशभर में पैदल यात्रा की। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य की प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ भारत की उन्नति के लिए यह भारत स्वस्तिक यात्रा निकाली गई। इस मौके पर उन्होंने भक्तों को हिमालय और यहां विराजमान भगवान शंकर की महिमा का वर्णन बताया।
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मोरारी बापू ने भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ में रामकथा करते हुए हिमालय की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इसके जैसा कोई और स्थान नहीं है जहां स्वयं भगवान शिव विराजते हैं। कथा विराम के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। भारत स्वास्तिक यात्रा का पहला चरण पूरा होने के बाद मोरारी बापू एवं अन्य भक्त केदारनाथ से वापस लौट गए। इस मौके पर जगतगुरु सतुवा बाबा, रूपेश व्यास सहित कई साधु-संत एवं भक्त मौजूद रहे।

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केदारनाथ सबसे पवित्र शिव तीर्थों में से एक

हिमालय में समुद्र तल से लगभग 3,580 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ देश के सबसे पवित्र शिव तीर्थों में गिना जाता है। यह मंदिर उस पवित्र भूभाग में स्थित है, जिसे परंपरागत रूप से केदारखंड के नाम से जाना जाता है। इसके निकट ही मंदाकिनी नदी का उद्गम क्षेत्र है। मंदिर की भव्य पत्थर की संरचना, शिवलिंग का विशिष्ट प्राकृतिक स्वरूप और चारों ओर फैला विराट पर्वतीय परिदृश्य इसे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थों में स्थान देते हैं।



शंकराचार्य को यहीं मिली थी मुक्ति

केदारनाथ का आदि शंकराचार्य से भी गहरा संबंध है। आदि शंकराचार्य दार्शनिक संत थे, जिन्होंने सनातन धर्म को सुदृढ़ करने और भारत में तीर्थयात्रा और मठ परंपराओं के पुनरुत्थान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ के निकट अपनी अंतिम मुक्ति प्राप्त की थी। मंदिर के पीछे स्थित आदि शंकराचार्य समाधि स्थल इसी परंपरा से जुड़ा है। उनका केदारनाथ से संबंध हिमालय की तीर्थ परंपरा को भारत की व्यापक आध्यात्मिक विरासत से जोड़ता है, जो उत्तर के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर दक्षिणी प्रायद्वीप तक विस्तृत है।
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संतकृपा सनातन संस्थान ने किया यात्रा का आयोजन

संतकृपा सनातन संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी मदन पालीवाल ने कहा कि केदारनाथ भारत की आध्यात्मिक विरासत की असाधारण निरंतरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यहां भगवान शिव की परंपराएं, आदि शंकराचार्य की विरासत और हमारे प्राचीन शास्त्रों का ज्ञान आज भी जनजीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं। भारत स्वस्तिक यात्रा का आयोजन संतकृपा सनातन संस्थान ने ही किया है। केदारनाथ में आयोजित रामकथा भारत स्वस्तिक यात्रा के प्रथम चरण का हिस्सा है। इसकी शुरुआत 10 अक्टूबर को कन्याकुमारी से हुई थी और 23 अक्टूबर 2026 को केदारनाथ में इसका समापन हुआ।
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