बाबा केदार की यात्रा से पैदा हुए उत्साह के परिणाम स्वरूप ही घाटी के ग्रामीण इस वर्ष सामूहिक रूप से पांडव नृत्य, पांडव लीला, रामलीला और बगड्वाल नृत्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।
इन आयोजनों में वर्षों बाद ध्याणियां अपने मायके पहुंच रही हैं। वहीं प्रवासी भी गांवों को लौटकर अपने घरों के ताले खोल रहे हैं। मक्कूमठ घाटी के पावजगपुढ़ा एवं कांदी गांव में आपदा के बाद पहली बार इन दिनों रामलीला हो रही है।
ग्राम पंचायत गैड, ग्वांस और बाडव में पांडव लीला व पांडव नृत्य और ग्राम पंचायत परकंडी के ककोला गांव में बगड्वाल नृत्य देखने भारी भीड़ उमड़ रही है। केदारघाटी के ककोला गांव निवासी सुरेशानंद भट्ट व अनसूया प्रसद बगवाड़ी ने बताया कि बाबा केदार की यात्रा से पैदा हुए उत्साह से गांवों में पुन: अपनी परंपराओं को संजोने का निर्णय लिया है।
धार्मिक आयोजनों से कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। 24 नवंबर को द्वितीय केदार श्रीमद्महेश्वर धाम के कपाट बंद होने पर डोली के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर आगमन पर मनसूना और ऊखीमठ में मद्महेश्वर मेले का आयोजन किया जा रहा है।