हाईवे की नहीं सुधरी स्थिति
आपदा में केदारनाथ हाईवे रुद्रप्रयाग से कुंड के बीच नौला-पानी, रामपुर, गंगतल महादेव और विजय नगर सहित कई स्थानों पर सात किमी पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। वहीं सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच पांच किमी मार्ग पैदल चलने लायक भी नहीं रह गया था।
बीआरओ द्वारा जैसे-तैसे आपदा के 18 माह बाद गौरीकुंड तक सड़क बहाल की गई। वर्ष 2015 में राजमार्ग को एनएच को हस्तांतरित कर दिया गया, लेकिन अभी तक सड़क पर कहीं भी न चौड़ीकरण हुआ है और न सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सेमी गांव के नीचे भू-धंसाव जोन पर भी खानापूर्ति की गई है। यात्रा तैयारियों के नाम पर बीते तीन वर्षो में लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी हाईवे बदहाल बना हुआ है।
गौरीकुंड नहीं पहुंची बस
आपदा के तीन वर्ष बाद भी गौरीकुंड तक बस सेवा बहाल नहीं हो पाई है। बीते वर्ष सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक राजमार्ग के पुन: कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने के बाद डीडीएम सिविल डिवीजन गुप्तकाशी द्वारा सड़क की मरम्मत की गई, लेकिन बड़े वाहनों का संचालन आज भी सपना बना हुआ है।
राजमार्ग की स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। चारधाम राजमार्ग प्रोजेक्ट के तहत चौड़ीकरण व डेंजर जोन का स्थायी ट्रीटमेंट होना है, जिसके लिए रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक राजमार्ग के लिए एक हजार करोड़ से अधिक स्वीकृत है। सर्वे कार्य के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
-- प्रवीन कुमार, ईई एनएच, रुद्रप्रयाग