रुद्रप्रयाग। सोलह वर्ष के सफर में उत्तराखंड में सड़कों का नेटवर्क आठ हजार किमी से बढ़कर 25 हजार किमी से अधिक हो गया है। बावजूद इसके रुद्रप्रयाग जनपद के कई गांवों के ग्रामीणों को अब भी 12 से 15 किमी की पैदल दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना होता है। यहीं नहीं एक किलो चीनी व तेल के लिए भी मीलों नापना पड़ रहा है।
रुद्रप्रयाग के जनपद में आने के बाद से दो सौ से अधिक छोटी-बड़ी सड़कें स्वीकृत हुई हैं, लेकिन धरातल पर नहीं उतरने से ग्रामीणों की दिक्कतें दूर नहीं हो पाई। 120 से अधिक सड़कें वनाधिनियम, ग्रामीणों की आपत्ति, समरेखण विवाद और विभागीय उदासीनता से लटकी हैं। रुद्रप्रयाग-ग्वेफड मार्ग पर लाखों खर्च के बाद भी पूरा नहीं बन पाया। पूर्व जिला पंचायत सदस्य अवतार सिंह राणा का कहना है कि 11 साल पहले साढ़े चार किमी अगस्त्यमुनि -डोभा मार्ग का निर्माण तो दूर, अभी फाइल रुद्रप्रयाग से देहरादून के चक्कर लगा रही है।
वर्षों से लंबित प्रमुख मोटर मार्ग
गैड-गडगू-बरंगडाली-पावजगपुरा, त्रियुजीनारायण-तोषी, फाफंज-बरसाल, सेमला-पलद्वाड़ी, कुणजेठी-ब्यूखी, राउलें-जग्गी-बेडूला, कुणजेठी-ब्यूखी, चिलौंड मोटर मार्ग, चाका-बुडोली, जैली-मरगांव-तैला, सूर्याप्रयाग-बंदरतोली-मवाण गांव-उरोला, सिद्धसौड़-बांद-जम्मूखाल, जाखाल-विराण गांव, दैजीमांडा-पौड़ीखाल, रतनगढ़-भणगा, अगस्त्यमुनि-नाकोट-ताली-चमेली, अगस्त्यमुनि-डोभा, बंदरतोली-तैला आदि। इधर पीएमजीएसवाई रुद्रप्रयाग डिवीजन की 8 सड़कों की डीपीआर पिछले दो वर्ष से शासन में धूल फांक रही है।
इनका कहना है -
रुद्रप्रयाग व ऊखीमठ लोनिवि की 50 सड़कों पर आपत्ति है। 50 से अधिक सड़कों के मामले वन विभाग के माध्यम से शासन को भेजे गए हैं। कुछ पर काम चल रहा है। प्रत्येक 15 दिन में लंबित मार्गों के निस्तारण को लेकर समीक्षा बैठक की जा रही है। इस संबंध में विभागाध्यक्षों को भी समय-समय पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
केस एक -
यूपी शासन में वर्ष 1994 में स्वीकृत और वर्ष 2002
से निर्माणाधीन कोट-घोलतीर मोटर मार्ग अब तक नहीं बन सका है। सड़क के अभाव
में रानीगढ़ व धनपुर पट्टी के दर्जनभर गांवों के ग्रामीणों को घोलतीर से 3
से 12 किमी पैदल दूरी तय कर रहे हैं।
केस दो -
केदारघाटी
क्षेत्र में जिले के अंतिम गांव तोषी के लिए त्रियुगीनारायण से 2004 में
सड़क स्वीकृत की गई। वर्ष 2013 में शासन स्तर पर बैठक भी हुई। बावजूद इसके
सड़क निर्माण आज तक शुरू नहंी हुआ। ग्रामीण एक तरफा 8 किमी पैदल नाप रहे
हैं।