रुद्रपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटे पर आरक्षण की गेंद शासन के पाले में है। लेकिन सात विकासखंडों में ब्लाक प्रमुखों की सीटों के आरक्षण घोषित होने के बाद जहां पिछले बार मनमाफिक आरक्षण नहीं होने से प्रमुख बनने से चूक गए कईं संभावित दावेदार मनमाफिक आरक्षण से खुश हैं। वहीं प्रमुख की सीटों के आरक्षण ने कईं नेताओं के प्रमुख बनने के ख्वाब को भी तोड़ दिया है। हालांकि अब सत्तारुढ़ भाजपा और कांग्रेस की नजर भी सातों सीटों पर है। पिछले बार एक सीट पर संतोष रखने वाली और इस बार सत्ता पर काबिज भाजपा की पूरी कोशिश सातों सीटों पर कब्जे की होगी। लेकिन कांग्रेस भी आरक्षण के बाद बदली परिस्थितियों में छह सीटों पर कब्जा कायम रखने की पूरी कोशिश करेगी।
दरअसल पिछले पंचायत चुनाव में प्रदेश की सत्ता पर कांग्रेस काबिज थी। जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा सात में छह विकासखंडों में कांग्रेस और समर्थित प्रमुख काबिज हुए थे। खटीमा से दान सिंह राणा, रुद्रपुर से दलजीत सिंह, काशीपुर से गुरमुख सिंह, बाजपुर से किशोरी देवी, जसपुर से सपना रानी और सितारगंज से कांग्रेस समर्थित मंजूलता सिंह जीती थी। एकमात्र गदरपुर सीट से भाजपा से सर्वजीत कौर प्रमुख बनी थी। अब बदली सियासी परिस्थितियों में प्रदेश की बागडोर भाजपा के हाथों में है। पांच सालों में जिले की सियासत में भी बड़े उलटफेर हुए हैं।
निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद गंगवार भाजपा में शामिल हो चुके हैं, वहीं काशीपुर के ब्लाक प्रमुख गुरमुख सिंह ने कुछ समय से कांग्रेस से फिलहाल खुद को किनारा किए हुए हैं। प्रमुख के साथ ही बीडीसी सीटों के आरक्षण में बदलाव ने निवर्तमान प्रमुखों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रुद्रपुर की सीट सामान्य से महिला आरक्षित हो चुुकी है। काशीपुर की सीट ओबीसी से सामान्य, सितारगंज की सीट भी महिला सीट से सामान्य, खटीमा की सीट सामान्य से ओबीसी, बाजपुर की सीट एसटी महिला से एससी महिला और जसपुर की सीट एससी से ओबीसी महिला की गई है।
रुद्रपुर की सीट पर आधी आबादी का कब्जा रहेगा। आरक्षण के बाद बदले हालातोंमें सातों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस की नजरें टिक गई हैं। दोनों ही सियासी दल प्रमुखों के लिए संभावित दावेदारों और उनकी बीडीसी सीटों में जीत के लिए मजबूत रणनीति तैयार करने की कसरत शुरु करेंगे। सियासी रण में सत्ता और विपक्ष का दबदबा कितनी सीटों पर रहता है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।