जिन खेतों में कभी गेहूं, जौ और सरसों और धान की फसलें लहलहाती थी, वे इस वर्ष सूखे पड़े हैं। घरों में खाने के लिए तो दूर, अगली फसल के लिए बीज तक नहीं रह गए है।
यह नजारा अगस्त्यमुनि ब्लाक के ग्राम पंचायत धारकोट का है। यहां 100 से अधिक परिवारों की 40 हेक्टेयर भूमि पानी के अभाव में सूखी पड़ी है।
ग्राम पंचायत धारकोट में डेढ़ सौ परिवारों की 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली सिंचित भूमि में उगने वाली फसलों से ही ग्रामीणों की आजीविका निर्भर थी।
हर परिवार कम से कम पांच कुंतल अनाज एक फसल से पैदा करता था।
इन खेतों में धान, गेहूं सहित अन्य नगदी फसलों का भी उत्पादन होता था। वर्ष 2013 की आपदा में गांव की पपिंग योजना के बह गई और सिंचाई नहर भी क्षतिग्रस्त हो गई।
ग्रामीणों ने फसल उत्पादन का प्रयास किया, लेकिन उत्पादन में 5 से 7 प्रतिशत भी नहीं हो पाया। सोना उगाने वाले खेतों में पानी के अभाव में दरारें पड़नी शुरू हो गई।
काश्तकार एसएन चौकियाल, भगत राम, जगत सिंह का कहना है कि घरों में खाने के लिए दूर, बीज के लिए भी अनाज नहीं है।
आपदा के बाद पपिंग योजना को दूसरे स्थान पर शिफ्ट तो किया गया, लेकिन ऊर्जा निगम से कनेक्शन नहीं मिलने से पपिंग शुरू नहीं हो पाई है।
इनका कहना है
प्रकृति की मार के बाद विभागों की लापरवाही से सिंचिंत खेत खत्म हो गए हैं। जो परिवार कभी अन्न से धनवान थे, उनके पास आज खाने तक के लिए अनाज नहीं है।
विभागों को अवगत कराने के बाद भी सुध नहीं ली जा रही है।- नरेंद्र सिंह नेगी, ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत धारकोट
हमारी तरफ से कोई कमी नहीं है। योजना बनकर तैयार है।
ऊर्जा निगम कनेक्शन लगाने में देरी कर रहा है। निगम अधिकारियों को लगातार अवगत कराया जा रहा है।
-- मनोज कुमार, एई नलकूप विभाग, रुद्रप्रयाग
नलकूप विभाग ने देरी से धन जमा कराया। इससे कनेक्शन देने में विलंब हुआ। दो माह में पपिंग योजना को पूरा कर लिया जाएगा। इन दिनों योजना पर बिजली लाइन पर कार्य चल रहा है। - शैलेंद्र बिष्ट, एई ऊर्जा निगम रुद्रप्रयाग