अंतिम गांव गौंडार में उरेडा की 100 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना 100 दिन से ठप पड़ी है। अतिवृष्टि ने परियोजना की टूटी नहर की मरम्मत न होने से बिजली उत्पादन नहीं हो रहा है, जिस कारण गांव के 75 परिवार अंधेरे में हैं।
जिला मुख्यालय से 76 किमी दूर बसे गौंडार गांव में 20 मई को हुई भारी बारिश व अतिवृष्टि से लघु जल विद्युत परियोजना क्षतिग्रस्त हो गई थी। गांव और वणतोली के बीच चट्टान धंसने से परियोजना की नहर पर लगे पाइप टूट गए थे। ऐसे में पावर हाउस तक पानी की सप्लाई ठप हो गई।
इससे 50-50 किलोवाट की दो टरबाइन ठप हो गईं। उरेडा और निर्माणदायी संस्था बागनाथ इंटरप्राइजेज द्वारा अभी तक परियोजना की मरम्मत नहीं की गई है। इस समस्या से गांव में पिछले सवा तीन माह से गांव में अंधेरा पसरा हुआ है। ग्रामीणों के रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
ग्राम प्रधान सुमन देवी, सुनीता देवी, मदन सिंह, ताजबर सिंह आदि का कहना है कि तीन माह से गांव अंधेरे में है। योजना की मरम्मत पर विभागीय लापरवाही भारी पड़ रही है। निर्माणदायी संस्था बागनाथ इंटरप्राइजेज बागेश्वर के महेश कांडपाल ने बताया कि पांच वर्ष तक परियोजना की देखरेख की जानी है। बरसाती सीजन में गौंडार में मोरकंडा नदी का जलस्तर बढ़ने से मरम्मत कार्य संभव नहीं है। 15 सितंबर के बाद मरम्मत कर बिजली उत्पाद शुरू कर दिया जाएगा।
गौंडार लघु जल विद्युत परियोजना बारिश व अतिवृष्टि से जो क्षतिग्रस्त हुई है। मरम्मत के लिए मई माह में ही सात लाख का ईस्टीमेट शासन को भेज दिया गया था, लेकिन अभी तक शासन स्तर पर इस संबंध में कोई जबाब नहीं मिला है।
- एलडी शर्मा डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर, उरेडा