पठन-पाठन के साथ अनुशासन और उपलब्धियां संजोए जीआईसी गुप्तकाशी किसी पहचान का मोहताज नहीं है। यहां पढ़े कई छात्र देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। यह सूबे का अकेला इंटर कालेज हैं जहां शिक्षक और प्रधानाचार्य भी ड्रेस में स्कूल आते हैं।
केदारघाटी के महामना की उपाधि से विभूषित स्व. गंगाधर मैठाणी ने वर्ष 1947 में गुप्तकाशी में माध्यमिक स्तर पर अशासकीय विद्यालय की स्थापना की। इस स्कूल पहले प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह भंडारी बाद में यूपी में कैबिनेट मंत्री रहे। 1 मार्च 1978 को यह विद्यालय राजकीय हुआ। पहले दिन से विद्यालय में अनुशासन का जो पाठ पढ़ाया गया, उसका पालन आज भी होता है। पढ़ाई ही नहीं अन्य गतिविधियाें में भी इस कालेज के छात्रों ने अपना लोहा मनवाया है। यही वजह है कि इसे मॉडल विद्यालय के लिए चुना गया है। वर्तमान में यहां छात्र संख्या 528 है, जो जिले के सर्वाधित संख्या वाला दूसरा राजकीय विद्यालय है। विद्यालय स्तर पर प्रतिवर्ष केदार ज्योति पत्रिका का प्रकाशन होता है। इसमें छात्र-छात्राओं के अलावा शिक्षक-प्रधानाचार्य के लेख, कविताएं प्रकाशित होती हैं।
2007 में लागू हुआ ड्रेस कोड
वर्ष 2007 से यहां ड्रेस कोड लागू किया गया। सर्दियों में स्लेटी रंग की पैंट, सफेद कमीज और कोट और गर्मियों में सफेद कमीज, स्लेटी रंग की पैंट और लाल की रंग टाई शामिल हैं। यहां तैनात प्रधानाचार्य केएस राणा को वर्ष 2008 में राष्ट्रपति सम्मानित कर चुके हैं।
72 छात्र-छात्राएं बना चुके मेरिट में स्थान
उत्तर प्रदेश हो चाहे उत्तराखंड। बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल व इंटर में जीआईसी गुप्तकाशी के छात्र-छात्राओं ने दबदबा बनाया हुआ है। वर्ष 1980 से 2015 तक 72 छात्र-छात्राओं ने मेरिट में स्थान पाया है। हाईस्कूल में 2001 में अरुण राणा ने प्रदेश में तीसरे, 2007 में मनीषा ने 14 वें और 2010 में महिमा ने छठे स्थान पर रहे। 2003 में इंटरमीडिएट में अरुण राणा ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद यह छात्र वर्तमान में अमेरिका में किसी कंपनी में उच्च पद पर आसीन है।
कोट-
जीआईसी गुप्तकाशी शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्र ही नहीं प्रदेश को भी गौरवान्वित कर रहा है। इस विद्यालय को मॉडल के लिए चयनित किया गया है। दो लाख रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं।
-- सुभाष चंद्र भट्ट, मुख्य शिक्षाधिकारी रुद्रप्रयाग