मृत शशि के पिता राम सिंह बिष्ट और मां उमा देवी मजदूरी, पशुपालन और खेती के सहारे अपनी गृहस्थ की गाड़ी आगे बढ़ा रहे हैं। चारों संतानों में सबसे बड़ा बेटा दिनेश हाईस्कूल के बाद नौकरी की तलाश में दिल्ली चला गया था। बेटी शशि ने भी पिता की स्थिति को देख आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और अपने माता-पिता के साथ काम में उनका हाथ बटाने लगी।
उसके दो छोटे भाई श्रवण व लक्ष्मण जूनियर कक्षाओं में पढ़ रहे हैं। ग्रामीण राजेंद्र सिंह व शेर सिंह बताते हैं शशि बहुत जिम्मेदार लड़की थी। वह अपने घर की स्थिति को अच्छी तरह से जानती थी। यही वजह है कि उसने पढ़ाई छोड़कर माता-पिता का हाथ बंटाना उचित समझा था। सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि भले ही शशि ने पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन वह चाहती थी कि उसके छोटे भाई खूब पढ़ें और आगे बढ़ें।
सड़क होती तो नहीं खोते बेटी
ग्राम प्रधान बीरा देवी का कहना है कि पावौ गांव सड़क से जुड़ा होता तो उन्हें आज एक बेटी को नहीं खोना पड़ता। ग्रामीणों को रुद्रप्रयाग पहुंचने के लिए नौ किमी पैदल और 32 किमी सड़क का का सफर तय करना होता है। सड़क तक पहुंचने के लिए भी तीन किमी की खड़ी चढ़ाई है। घटना के दिन तीनों किशोरियों को जिला अस्पताल तक ले जाने में छह घंटे लग गए थे।
हालत खतरे से बाहर
पावौ गांव की कमला पुत्री हुकम सिंह बेस अस्पताल श्रीनगर और कमला पुत्री रामेश्वर सिंह कोरोनेशन अस्पताल देहरादून में भर्ती हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि दोनों की स्थिति खतरे से बाहर है। हालांकि कई बार दर्द बढ़ने से उन्हें तकलीफ हो रही है।